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बॉक्सर मनीष और विकास कृष्ण के कॉमनवेल्थ के फाइनल में पहुुुंचने पर भिवानी में मना जश्न

3 वर्ष पहले
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राष्ट्रमंडल खेलों में आज का दिन भिवानी वालों के लिए खास रहा। आज जहां दो मुक्केबाज फाइनल में पहुंच गए वहीं तीसरे मुक्केबाज नमन तंवर को कांस्य पदक पर संतोष करना पड़ा। गांव देवसर निवासी बॉक्स मनीष कौशिक के कॉमनवेल्थ खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा के फाइनल में पहुंचते ही परिजन जश्न में डूब गए और बधाई देने वालों का उनके घर ताता लग गया। मनीष अब 60 किलो भार वर्ग में 14 अप्रैल को स्वर्ण पदक के लिए खेलेंगे।

मिनी क्यूबा भिवानी में शुक्रवार सुबह से ही कॉमनवेल्थ खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा पर लगी थी। भिवानी के तीन बॉक्सरों के सेमीफाइनल मुकाबले सुबह नौ बजे शुरू हुए। 60 किलो भार वर्ग में मनीष कौशिक ने आयरलैंड के मुक्केबाज नगेवन से जीत दर्ज करते ही पूरा जिला जश्न में डूब गया। बेटे की जीत पर गांव देवसर भी जश्न में डूब गया। देवसर में बच्चे बच्चे की जुबान पर शुक्रवार को मनीष का ही नाम था। मनीष के छोटे भाई संदीप कुमार ने बताया कि भाई ने भले ही रजत पदक पक्का कर लिया लेकिन मनीष देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर ही वापस लौटेगा। माता देवकी व पिता सोमदत्त कौशिक ने बताया माता रानी की मेहर से उनका बेटा गोल्ड लेकर ही आएगा। द्रोणाचार्य अवार्डी कोच जगदीश मनीष के पूर्व कोच रहे हैं।

विकास कृष्ण

मनीष कौशिक

दोनों खिलाड़ियों का पदक पक्का, लोगों को उम्मीद है कि वे देश को गोल्ड मेडल दिलाएंगे
मनीष की माता देवकी को मिठाई खिलाती महिलाएं।

विकास की मां दर्शना, बेटी नाइशा, बेटे धनंजय व वीर।

सोना जीतकर ही आएगा म्हारा विकास
बॉक्सर विकास कृष्ण भी पहुंचे फाइनल में भिवानी के बॉक्सर विकास कृष्ण ने भी सेमीफाइनल मुकाबला जीत कर देश के लिए रजत पदक पक्का कर दिया है। सेक्टर 13 में रहने वाले विकास कृष्ण की जीत से शहर में जश्न का माहौल है। पिता कृष्ण व माता दर्शना ने बताया कि उन्हें अपने बेटे पर नाज है और उम्मीद है कि उनका बेटा देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर आएगा। विकास के बेटे बीर धनंजय व बेटी नाइसा भी अपने पिता काे बॉॅक्सिंग खेलते देख तालियां बजा रहे थे।

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