फसल अवशेष जलाना है कानूनी जुर्म, उल्लंघन करने पर जेल व जुर्माना : एडीसी
भिवानी। फसल अवशेषों को जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है इसलिए जिले के किसान अपनी फसल की कटाई के पश्चात अवशेषों को न जलाएं। एडीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने बताया कि फसल अवशेषों फानों, ठूंठ को जलाना कानूनी जुर्म है। कोई भी किसान खेतों में फसल के अवशेष जलाता है तो आईपीसी की धारा 188 के तहत उसे छह महीने की जेल या 15 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। फसल के अवशेष जलाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने वाले मित्र कीट व माइक्रोन्यूट्रिएंट नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ-साथ पृथ्वी पर अन्य जीव-जन्तु भी समाप्त हो जाते हैं। भूमि में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से प्रदूषण फैलता है।
अवशेष न जलाने पर ये हैं लाभ
फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे किसान को खेत में अतिरिक्त खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती। वातावरण शुद्ध रहता है। मशीनों के प्रयोग से समयानुसार खेत की जुताई होती रहती है।
इस बारे में एडीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण की ओर से किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फसल अवशेष न जलाने का अभियान गेहूं की कटाई तक जारी रहेगा। जिले में जो भी किसान फसलों के अवशेष जलाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।