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सहमति के बावजूद मांगें पूरी नहीं हुई तो फिर सड़कों पर उतरी आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स

3 वर्ष पहले
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बीते दिनाें एक माह चलते आंगनबाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स का धरने-प्रदर्शन के बाद 10 मार्च को मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स की 12 सूत्रीय मांगों पर सहमति जताई थी। इसके बाद हर जिला मुख्यालय पर इनकी हड़ताल समाप्त हो गई थी। इन मांगों को पूरा तो किया गया लेकिन नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। इसके विरोध में साेमवार काे लघु सचिवालय के बाहर एक बार फिर से आंगनबाड़ी वर्कर्स व हैल्पर्स ने सरकार के खिलाफ के मोर्चा खोल नारेबाजी की।

आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हैल्पर्स यूनियन से सदस्य कंचन व कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली थी तथा कुशल आंगनबाड़ी वर्कर्स को 11 हजार 429 रुपये व अकुशल आंगनबाड़ी वर्कर्स को 10 हजार 286 रुपये व हैल्पर्स का मानदेय बढ़ाने, आंगनबाड़ी के संचालन के लिए बड़े शहरों में 5 हजार, छोटे शहरों मेे 3 हजार व गांवों में 750 रुपये देने, काम के दौरान वर्कर्स या हैल्पर्स की मृत्यु होने पर आश्रित को तीन लाख रुपये मुआवजा देने आदि 12 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी थी, परन्तु सहमति के बावजूद सरकार इन मांगों को पूरा नहीं कर रही। इसीलिए वे प्रदर्शन कर डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेज रहे हैं। यदि उनकी मांगें पूरा करने का नोटिफिकेशन जल्द पूरा नहीं किया गया तो 29 अप्रैल को जींद में राज्य स्तरीय रैली कर अपने आंदोलन को फिर से तेज करने का काम करेंगे। इस अवसर पर सीटू नेता कामरेड ओम प्रकाश, रत्तन कुमार जिंदल, फूल कुमार, संतोष ग्रेवाल, राजबाला, कंचन, ईश्वर देवी, बबीता, किरण, प्रमिला, बिमला अादि मौजूद थे।

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