सतगुरु वो है जो रूहानी दौलत को प्राप्त कर आपके अज्ञान काे दूर कर आपको प्रकाश की ओर ले जाता है। जिसे पूरा सतगुरु मिल जाता है वह भवसागर से पार हो जाता है। सतगुरु मिलने से ही विवेक का जागरण होता है और जिसका विवेक जाग जाता है वो खुद तो तिरता ही है दूसरों को भी तार ले जाता है। यह सत्संग प्रवचन दिनोद स्थित राधा स्वामी आश्रम में संत कंवर साहेब महाराज ने कही।
उन्होंने बताया कि यह जीव इस काल के कैदखाने में कैद है। केवल सतगुरु की शरण से ही वो कैदखाना छूट सकता है लेकिन आज स्थिति बहुत विकट है। पाखंडी और झूठे गुरु बने फिरते हैं। वो खुद तो नरकों के वासी है ही लेकिन ऐसे गुरुओं के शिष्यों की भी गति नहीं सुधरती। आपके अच्छे आचरण को देखकर और भी कितने जीव उस रास्ते को अपनाते हैं।
इसलिए सत्संगी हो तो बाणा नहीं बाण बदलो। अपने आचरण में परिवर्तन लाओ। बाहरी आचरण बदलोगे तभी अंतर में बदलाव आएगा। गुरु को शिष्य की भलाई के लिए ना जाने कितने स्वांग करने पड़ते हैं। गुरु और शिष्य का नाता श्रद्धा और विश्वास का है। उन्होंने बताया कि हम गफलत में अपने चंदन रूपी काया लकड़ी को जलाकर कोयलों में बदल रहे हैं। माया का यह गुण है जिसे यह मिलने लग जाती है उसकी तृष्णा और बढ़ती जाती है। कंवर महाराज ने बताया कि पास नाम है वो तो शाहों का शाह है। उन्होंने बताया कि अपने विश्वास को मत डिगने दें, घरों का वातावरण ठीक करो।
जब तक हमारा चरित्र अच्छा नहीं है, आदत हमारी पाक पवित्र नहीं है तब तक नाम हमारे घाट में नहीं उतरता। उन्होंने उपस्थितजनों से कहा कि अपने चित को पवित्र रखो। घरों में प्यार प्रेम का माहौल रखो। बच्चों को अच्छी शिक्षा दो अपना सा जीव सबको मानो परमात्मा आपसे दूर नहीं है। उन्होंने बताया कि अच्छी संगति ही सत्संग है इसलिए सत्संग को बाहरी और भीतरी आचरण में परिवर्तन के लिए इस्तेमाल करो।
जाे अज्ञानता काे दूर कर प्रकाश की ओर ले जाता है वही सच्चा गुरु : कंवर महाराज
आश्रम में प्रवचन करते कंवर महाराज।