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कलयुग में केवल नाम ही प्रभु स्मरण का एकमात्र आधार है: करुणा गिरि

3 वर्ष पहले
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जोगीवाला शिव मंदिर में महंत वेदनाथ महाराज के सानिध्य में श्रीराम कथा में संत कृपा और भगवान राम की भक्ति प्रसंग काे दर्शाया। कथा में बताया कि श्रीनाथद्वारा कलयुग केवल नाम अधारा, जपत जपति नर होय पारा कलयुग में केवल नाम ही प्रभु स्मरण का एकमात्र आधार है, तुम राम का नाम लेते हो या कृष्ण का या किसी का भी उस में दिक्कत नहीं। बस केवल नाम लो और उसमे प्रभु का स्मरण करो यही कलयुग में भाव पार होने का एकमात्र साधन है।

यह बात कथा व्यास साध्वी करुणागिरि महाराज ने भगवान की स्तुति पर प्रकाश डाला। कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि उनका व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि प्रेम से ऊंचा धरती पर कुछ नहीं है। केवल प्रेम ही है जो सभी को बांधे रखता है। सबसे ऊंची प्रेम सगाई प्रेम के वशीभूत हो ईश्वर, जब बुलाओं दौड़े चले आते हैं। बुधवार को महिलाओं को बेटी संस्कार, संस्कृति पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि हमें बेटियों को संरक्षण देना चाहिए। उन्होंने बताया कि बेटी ही है जो दो घरों को संवारती है। इस अवसर पर कथा में अनेक भक्तगण मौजूद थे।

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