फसलों के अवशेष जलाने से जहरीली हुई हवा, श्वास रोगी बढ़े
शहर की सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों व कटाई के बाद जलाए जा रहे अवशेष लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। वाहनों के धुंए और अवशेष जलाने से दिन प्रतिदिन हवा जहरीली हो रही है। ऐसे में सांस रोगी व आंखों के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। हवा में मौजूद रसायनों से चर्म व एलर्जी के रोगी भी बढ़े हैं।
चौधरी बंसीलाल सामान्य अस्पताल की अाेपीडी में रोजाना 50 से अधिक श्वास व इसी प्रकार से अनेक नेत्र रोगी पहुंच रहे हैं जबकि पहले यह आंकड़ा काफी कम था। राेजाना अकेले सामान्य अस्पताल में 1300 से अधिक मरीज विभिन्न राेगाें का इलाज कराने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। जहरीली हवा आमजन के फेफड़ों, नेत्र व चमड़ी के रोगों को बढ़ावा दे रही है। इस बार फसलों के अवशेषों के जलने से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। इस समय मौसम में धुलिया कण सबसे ज्यादा है। मौसम में धुलिया कण की स्टेज 100 होने के बाद खतरा बढ़ जाता है।
आंखों में एलर्जी के रोगी बढ़े
वायु प्रदूषण के चलते जिला अस्पताल में ओपीडी की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। पहले जहां नेत्र ओपीडी पहुंच रही थी 100 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है। नेत्र चिकित्सकों के पास आईफ्लू व आंखों की एलर्जी के मरीज बढ़ रहे हैं। वायु प्रदूषण से आंखों में जलन होती है। इसके चलते आंखों में एलर्जी की संभावना बढ़ती जा रही है। सामान्य अस्पताल के मेडिसन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रघुबीर शांडिल्य ने बताया कि प्रदूषण के हानिकारक कण मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। खेतों मेें निकाले जा रहे तूड़े के कण हवा में उड़कर आ रहे हैं। जो श्वास के साथ नागरिकों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। एेसे में श्वास राेगियाें काे सांस लेने तक में भारी परेशानियाें का सामना करना पड़ता है। वहीं धूल भरा मौसम व बढ़ती गर्मी भी मरीजों की संख्या बढ़ाने में सहायक है। उन्होंने बताया कि नागरिकों को वायु प्रदूषण से बचने के लिए मुंह पर मास्क या सूती कपड़े को प्रयोग में लाना चाहिए। यदि संभव हो तो दोपहर में सीधी धूप से बचना चाहिए। स्वास्थ्य खराब होने की स्थिति में तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
नुकसान के प्रति बार-बार जागरूक करने के बावजूद रात को फाने जलाकर घर चले जाते हैं कई किसान, विभाग नहीं कर पा रहा कोई कार्रवाई
नप कर्मियों की हड़ताल के कारण शहर में जगह-जगह कूड़े व पेड़ों के पत्तों में आग लगाई जा रही है। जो प्रदूषण को बढ़ावा देने के साथ ही अनजाने में ही सही शहरवासियों की सेहत पर हावी बन रहा है। अनेक जगहों पर किसान फसल की कटाई करने के बाद बचे अवशेषों को जलाना शुरू कर देते हैं। इसके चलते हवा में प्रदूषण की मात्रा निरंतर बढ़ती जा रही है। हालांकि प्रशासन ने अवशेषों को जलाने वाले किसानों पर नकेल कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विभाग की ओर से किसानों को फसलों के फाने न जलाने के लिए भी अवगत करवाया गया है इसके बावजूद कई किसान देर रात फानों में आग लगाकर घर चले जाते हैं जो अक्सर दूसरों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। शहर की सड़कों पर दिनोंदिन वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। सुबह से शाम तक सड़कों पर ट्रैफिक दौड़ता है। अकेले भिवानी शहर में सुबह से शाम तक तीन हजार से अधिक ऑटो सरपट दौड़ते रहते हैं। जिलेभर में 30 हजार से ज्यादा कारें दौड़ रही हैं। बढ़ते ट्रैफिक से भी प्रदूषण स्तर दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
भैणी के खेतों में गेहूं के फानों में लगी आग। मनाही के बावजूद कई किसान देर रात फानों में आग लगाकर घर चले जाते हैं जो दूसरों के लिए नुकसानदायक भी साबित हो रहा है।