अाज से मलमास शुरू, दान-पुण्य बनाएगा धनवान
16 मई से शुरू होने वाले पुरुषोत्तम मास के कारण एक माह तक शादी या मांगलिक कार्यक्रमों की शहनाई नहीं बजेगी। मंगलवार से शुरू हुए हिंदू पंचाग का ज्येष्ठ महीना इस बार दाे बार पड़ रहा है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जब किसी वर्ष का कोई महिना दो बार पड़ता है तो इसके बीच की अवधि को पुरुषोत्तम मास या अधिक मास कहा जाता है।
ज्याेतिषाचार्य पंडित कृष्ण कुमार शर्मा नांवा ने बताया कि इस दौरान कथा सुनने, दान करने एवं सत्संग एवं तीर्थ भ्रमण का विशेष फल मिलता है लेकिन इस दौरान मांगलिक कार्यों का निषेध होता है। इस बार मल मास के नाम से पहचाना जाने वाला पुरुषोत्तम मास 13 जून तक रहेगा तथा 19 जून से विवाह के मुहूर्त शुरू होंगे। उन्होंने बताया कि हिंदू पंचाग के अनुसार जब तिथियों में कोई घट-बढ़ होती है तो इस दौरान 3 साल में करीब 30 दिनों की बढ़ोतरी हो जाती है।
इसी अधिक दिनों को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। अधिकमास में किए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य मास में किए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना यह लोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।
मल मास हो गया पुरुषोत्तम मास
पंडित कृष्ण शर्मा ने बताया कि शास्त्रों अनुसार जब मलमास मांगलिक कार्यों के लिए निषेध माना गया तो वह दु:खी होकर भगवान विष्णु के पास गया और प्रणाम कर कहने लगा भगवन न तो मेरा नाम, न आश्रय तथा स्वामी भी नहीं है, सब मुझसे घृणा करते हैं। भगवान विष्णु बोले-परेशान मत हो, चलो मैं तुम्हे गोलोक लेकर चलता हूं। वहां भगवान श्रीकृष्ण निवास करते हैं। उस लोक में कोई व्याधी नहीं है। इसके बाद भगवान विष्णु ने मलमास के दु:खी होने का कारण सुनाया।
भगवान कृष्ण ने कहा भगवन आज से ये मेरे समान हैं। अब से आगे इसका मैं स्वामी बन गया हूं। इसी कारण श्रीमद्भागवत कथा, पूजा, यज्ञ, दान, अनुष्ठान, भगवान पुरुषोत्तम का पूजन होता रहेगा। इस व्यवस्था से मल मास पुरुषोत्तम मास हो गया।
धर्म-कर्म
13 जून तक रहेगा पुरुषोत्तम मास, 19 जून से शुरू होंगे विवाह के मुहूर्त, हिंदू पंचाग के अनुसार इस बार होंगे दो ज्येष्ठ माह