आज किसी भी पेशे में महिलाओं की पहचान एक किसान, मजदूर व कर्मचारी के रूप में नहीं है जबकि वे दिनरात मेहनत करके परिवार की परवरिश करती हैं और पुरुषों से आगे बढ़कर खेती, मजदूरी व नौकरी भी करती हैं।
यह बात अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति भिवानी इकाई के आह्वान पर ग्रामीण महिलाओं की रोजगार मुद्दे पर जाट धर्मशाला में संपन्न कन्वेंशन में बतौर मुख्य वक्ता माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्या व महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली सहगल ने कही। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं का आंदाेलन सशक्त नहीं होगा उनकी पहचान, उन पर होने वाले उत्पीड़न व अत्याचार को नहीं रोका जा सकता। उन्हाेंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार समान काम समान वेतन की धज्जियां उड़ाई जा रही है। रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों को सस्ते भाव में पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। राशनकार्ड, पेंशन व तमाम कल्याणकारी योजनाएं खत्म की जा रही है। भीम अवार्डी जगमती सांगवान ने बताया कि पोंगा पंथी, अंधविश्वास व बाबाओं की भक्ति के कारण महिला आंदोलन को मजबूत होने में रूकावट डाल रही है। सम्मेलन में प्रस्ताव पारित करके नगरपालिका कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया गया। कन्वेंशन की अध्यक्षता समिति की जिला प्रधान शीला बलियाली व मंच का संचालन संतोष देशवाल ने किया। इस अवसर पर संतोष देशवाल, बिमला घनघस, नीलम शर्मा, कामरेड ओम प्रकाश, सज्जन कुमार सिंगला, चंद्रभान, रामफल देशवाल, कमल प्रधान, फूलचंद, रत्तन जिंदल, जयराम, वेद प्रकाश रोहनात, करतार ग्रेवाल अादि माैजूद थे।