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60 फीसदी से अधिक लोग हाईपरटेंशन बीमारी से अंजान, 20 से 30 फीसदी तक युवा इसकी जकड़ में

3 वर्ष पहले
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एनसीआर सिटी के लोगों को काम की टेंशन और काम का बढ़ता बोझ उच्च रक्तचाप यानि की हाई ब्लड प्रेशर का रोगी बनाता जा रहा है। शहर के अनेक लाेग हाइपरटेंशन की चपेट में हैं। इसमें से करीब 60 फीसदी लोगों को हाइपरटेंशन की जानकारी तक नहीं है। कई बार मरीज को बीमारी के गंभीर अवस्था में पहुंच जाने के बाद इसकी जानकारी होती है। हाइपरटेंशन के मरीजों में शहरी के क्षेत्र के 20 से 30 फीसदी युवा इसकी चपेट में हैं।

हाइपरटेंशन यानि उच्च रक्त चाप भी कहा जाता है। इसमें रक्त वाहिनियों में रक्त का दबाव लगातार बढ़ा हुआ होता है। दबाव जितना अधिक होगा हृदय को उतनी अधिक क्षमता से पम्प करना पड़ेगा। हाइपरटेंशन के कारण विभिन्न अंग क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और किडनी, हार्ट फेल होना, स्ट्रोक या हृदयाघात आदि हो सकते हैं। इसमें ब्लड प्रेशर 140 व 90 से अधिक हो ताे आप इस बीमारी के शिकार हैं।

उच्च रक्तचाप से हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा ज्यादा

सामान्य अस्पताल के मेडिसन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रघुबीर शांडिल्य ने बताया कि अधिकांश मामलों में हाइपरटेंशन से ग्रस्त होने के बावजूद लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती। उच्च रक्तचाप से ग्रसित लोगों को हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा रहता है। इससे बचने के लिए नियमित व्यायाम, बेहतर खानपान और न्यूनतम आठ घंटे नींद लें। स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप अधिकतम 120 एचजी और कम से कम 80 एचजी होता है। 120 एचजी से ऊपर रक्तचाप जाने पर व्यक्ति इसकी चपेट में होता है। हाइपरटेंशन से शुरूआत में कोई दिक्कत नहीं होती। समय-समय पर बीपी जांच कराने पर ही इसका पता चल पाता है। इसे साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि सीधे तौर पर गुर्दे, दिल और मस्तिष्क को प्रभावित करता रहता है।

हाईपरटेंशन के कारण किडनी, हार्ट फेल होना, स्ट्रोक या हृदयाघात का ज्यादा खतरा

ऐसे समझें बीपी को

सामान्य- 120-80

प्री-हाई- 120-130

स्टेज टू- 130-140

ज्यादा हाई- 140 से ऊपर

ऐसे करें बचाव

भोजन में वसा की मात्रा कम करें।

फलों को आहार का हिस्सा बनाएं।

वजन को कम करें, यदि अधिक हो तो। धूम्रपान छोड़ दें।

समय-समय पर चिकित्सक से बीपी की जांच जरूर करानी चाहिए।

बीपी को सामान्य रखने के लिए लोगों को खाने में नमक का सेवन नियंत्रित

करें और व्यायाम करें।

रेड मीट का सेवन न करें, नियमित तौर पर योग-व्यायाम करें, धूम्रपान-शराब का सेवन न करें।

नियमित शारीरिक श्रम करें, जैसे कम से कम 5 किलोमीटर दिन में पैदल जरूर

चलना चाहिए या 45 मिनट भ्रमण करें।

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