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10 हजार सफाई कर्मचारियों के वोट की खातिर 2 करोड़ मतदाताओं को भूले नेता

3 वर्ष पहले
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भास्कर टीम| पानीपत व प्रदेश के विभिन्न जिलों से

प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 12वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस दौरान सरकार से बैठकें होने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल रहा। प्रदेश के विभिन्न शहरों में 2 लाख टन से ज्यादा कूड़ा गलियों, सड़कों और बाजारों में बिखरा पड़ा है। हर जगह महामारी फैलने जैसी स्थिति हो रखी है। इसके बावजूद सरकार से लेकर अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता भी 10 हजार सफाई कर्मचारियों के वोट के चक्कर में प्रदेश के 2 करोड़ के वोट बैंक को भूल रहे हैं। शहरों में सफाई की इतनी ज्यादा चिंता नहीं है, जितनी कर्मचारियों की है।

नेताओं का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की मांगें मानी जाएं और वे उनके साथ हैं। कोई इसे शोषण बता रहा है तो कोई सरकार को उसका घोषणा पत्र याद दिला रहा है। वहीं कुछ नेता तो शहर के लोगों को भूल कर्मचारियों के साथ भूख हड़ताल करने की चेतावनी दे रहे हैं। कर्मचारी अपनी मांगों के लिए हड़ताल करें ठीक हैं, लेकिन कोई संस्था या अधिकारी कूड़े को उठवाए उसके साथ हिंसा करना कितना सही है। अब तो लोग पूछ रहे हैं कि यह नाटक कब तक चलेगा? सरकार और कर्मचारियों में बन नहीं रही है। किसी अन्य को कूड़ा उठाने नहीं दिया जा रहा है। नेता शहरों में रह रहे लोगों को भूल कर केवल कर्मचारियों के बारे में सोच रहे हैं। इसी तरह चलता रहा तो कूड़ा फैलता ही चला जाएगा और शहरों में महामारी फैल जाएगी।

सरकार को भी जल्द फैसला करना चाहिए नहीं तो फैल सकती महामारी

हर बार स्थिति अनियंत्रित होने का इंतजार : कूड़े से लोग आजिज आ चुके हैं और कहते हैं कि आखिर सरकार हर बार स्थिति के अनियंत्रित होने का इंतजार क्यों करती है? मामला चाहे आरक्षण आंदोलन का हो, बाबा का हो या फिर अब कूड़ा उठाने का हो, हर बार स्थिति अनियंत्रित होने के बाद ही सरकार एक्शन लेती है। अब तक प्रदेश में जितने भी आंदोलन हुए हैं। हर बार महीनों चलने के बाद उनका समाधान निकलता है, तब तक आर्थिक और सामाजिक हानि हो चुकी होती है। इसी तरह अब सफाई कर्मचारियों की हड़ताल में सरकार को शहरों में सफाई की चिंता ही नहीं है। सरकार न तो मांगें पूरी करके या आश्वासन देकर सफाई कर्मचारियों को मना पा रही है। न ही सरकार सफाई के लिए कोई दूसरा विकल्प खोज रही है। लोगों का कहना है कि सरकार के अधिकारी और पुलिस भी कूड़ा उठवाने में कर्मचारियों के सामने हार चुके हैं। ऐसे में क्या कूड़ा उठवाने के लिए भी अब सरकार को आर्मी बुलानी पड़ेगी।

मांगों से ज्यादा हुई अहम की लड़ाई : सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का मामला अब केवल उनकी मांगों तक सीमित नहीं रहा है बल्कि अहम का मुद्दा बन गया है। यही कारण है कि लगातार बैठकों के बावजूद समाधान नहीं निकल रहा है। ज्यादातर मांगें मानी जा चुकी हैं और कुछ पर कोर्ट में मामला अटका है। इसके बावजूद कर्मचारी न केवल हड़ताल कर रहे हैं बल्कि हिंसा पर उतारू हैं। पूरे प्रदेश में विभिन्न शहरों से लगातार हिंसा के मामले सामने आ रहे हैं। मंत्री कविता जैन के जिले सोनीपत के डीसी तक इस हिंसा के शिकार हो चुके हैं। कहीं पानीपत में ट्रैक्टर की टंकी में चीनी डाल रहे हैं तो कहीं पुलिस के साथ भी हाथापाई हो रही है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर कर्मचारियों को पकड़ कर जेल में डालना पड़ा है।

इन पर फंसा पेंच

कर्मचारी: ठेका प्रथा तुरंत खत्म की जाए।

सरकार: समय पूरा होते ही ठेका खत्म हो जाएगा।

कर्मचारी: सामान काम-सामान वेतन लागू हो।

सरकार: कमेटी बनाई है।

कर्मचारी: सरकार न्यूनतम 15 हजार रुपए वेतन दे।

सरकार: रुख स्पष्ट नहीं। ऐसा किया जाता है तो दूसरों को भी देना पड़ेगा।

कर्मचारी: कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।

सरकार: सरकार की 2014 की पॉलिसी कोर्ट में चैलेंज की हुई है। इस पर स्टे है।

मांगों को पूरा करना चाहिए : अभय चौटाला

नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री को हड़ताली सफाई कर्मचारियों की मांगों को जल्द पूरा करना चाहिए। सत्ता पर काबिज होने से पहले भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में जो वादा किया था उसे पूरा करे। गरीब सफाई कर्मचारियों को शोषण किया जा रहा है। उनकी जायज मांगों को भी पूरा नहीं कर रही है।

करेंगे भूख हड़ताल : तंवर

अशोक तंवर ने कहा कि स्वच्छता का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा सरकार में सफाई करने वाले कर्मचारियों के साथ शोषण किया जा रहा है। उनको न तो समय पर वेतन दिया जा रहा है और न पर्याप्त वेतन। अगर सरकार ने सफाई कर्मचारियों की मांगों को पूरा नहीं किया तो कांग्रेस भी उनका समर्थन देगी। उनके साथ भूख हड़ताल भी करेगी।

यह कहते हैं नेता

वार्ता को तैयार: कविता

सरकार अभी तक कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने में ही अटकी है। इस पर नगर निकाय मंत्री कविता जैन का कहना है कि कर्मचारियों के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। वे आएं और एक-एक मुद्दे पर बातचीत करें। उनकी हर बात सुनी जाएगी और उन पर विचार किया जाएगा।

12 दिन की हड़ताल में प्रदेश के शहरों में 2 लाख टन कूड़ा जमा

कर्मचारियों का अपनी मांगों के लिए हड़ताल करना उनका हक

कूड़ा उठा रहे लोगों पर हमले करना गलत

अब समाधान नहीं तो और बिगड़ेंगे हालात

अभी तो सरकार की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। कर्मचारियों ने अब 23 व 24 मई को भाजपा विधायकों के आवासों पर घंटी बजाते हुए प्रदर्शन करने के साथ 25 मई से एक-एक दिन की क्रमिक भूख हड़ताल की घोषणा कर दी है। इधर, हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संघर्ष समिति ने कहा है कि यदि जल्द ही इन कर्मचारियों की मांग नहीं मानी, तो रोडवेज का चक्का जाम कर दिया जाएगा।

कर्मचारी नेताओं का आरोप- हम नहीं भाजपा करवा रही हिंसा

नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश शास्त्री और सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव सुभाष लांबा का कहना है कि उनका किसी से कोई विरोध नहीं है। हिंसा वे नहीं करते बल्कि सोनीपत में डीसी की मौजूदगी में भाजपा व उसके सहयोगी संगठनों के लोग जैली व फरसे लेकर आते हैं। हड़ताली कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी देते हैं। सरकार उनकी मांगें माने तो वे तुरंत हड़ताल खत्म कर देंगे, नहीं तो सरकार को जगाने के लिए प्रदर्शन जारी रहेगा।

कोर्ट में है मामला, नहीं मिल सकती राहत : बलदेव राज

हरियाणा के एडवोकेट जरनल बलदेव राज महाजन का कहना है कि वेतन आदि में फेरबदल करना सरकार के हाथ में है, लेकिन बड़ा पेंच रेगुलर करने का अटका हुआ है। इस पर कोर्ट का स्टे है। इसमें सरकार के पास एक ही विकल्प था कि जल्द सुनवाई के लिए अपील करे। यह हम कर चुके हैं, जिसके बाद कोर्ट भी जल्द सुनवाई का काम कर चुकी है। कोर्ट ने अब फैसला रिजर्व रखा हुआ है। ऐसे में कोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा। उसके बाद ही आगे के बारे में कुछ कहा जा सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट

इन शहरों में कूड़े का दंश झेलते लोग, कर्मी नहीं उठने दे रहे कूड़ा

पानीपत : 400 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। शहर में 25 हजार टन कूड़ा जमा है। जिला प्रधान सुभाष चंडालिया के दो बेटों समेत 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है। शनिवार को कचरा उठा रहे कर्मचारियों के साथ अज्ञातों ने हाथापाई की।

डबवाली : नगर परिषद क्षेत्र में 50 टन कूड़ा जमा हो चुका है। नगर परिषद चेयरपर्सन सुमन जोइया ने बताया कि 27 अनुबंधित कर्मी देने वाले ठेकेदार को नोटिस दिया है।

फतेहाबाद : जिले में करीब 500 कर्मचारी हड़ताल पर है। एक हजार टन से ज्यादा कूड़ा जमा है। कुछ कूड़े को लोगों द्वारा आग भी लगाई गई है। शुक्रवार को फतेहाबाद व टोहाना में कर्मचारियों ने कूड़ा उठाने का विरोध किया। महिलाएं ट्रैक्टर के आगे व नीचे लेट गई थी। बाद में उन्होंने कचरे को वहीं वापस बिखेर दिया था।

अम्बाला : शहर में 700 कर्मचारी हड़ताल पर है। लगभग 1530 टन कूड़ा जमा हो चुका है। संस्थाओं के माध्यम से कूड़ा उठाने के प्रयास हो रहे हैं।

झज्जर : 126 कच्चे सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। शहर के आउटर मार्गों और बाईपास पर कचरा बिखरा पड़ा है।

सिरसा : 263 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। 1080 टन कचरा जमा है। कूड़ा उठाने वालों के साथ हाथापाई की नौबत आई। नगर परिषद के मुख्य सफाई निरीक्षक देवेंद्र बिश्नोई पर तो कुछ हड़ताली सफाई कर्मचारियों हमला भी बोल दिया था। सीएसआई बिश्नोई ने भाग कर जान बचाई जबकि वहां पर पुलिस भी तैनात थी।

यमुनानगर : 370 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। शनिवार को कर्मचारियों ने स्टोर का ताला लगा दिया था। रविवार को रेलवे स्टेशन पर ठेकेदार को कूडा उठाने से सफाई कर्मचारियों ने रोक दिया।

रेवाड़ी : कुल 560 सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं। 1000 टन कूड़ा जमा है। दो दिन पहले कूड़ा उठाने के विरोध में सफाईकर्मी नगर परिषद अधिकारियों से उलझ गए थे। इस दौरान जमकर नोकझोंक हुई।

भिवानी : 350 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। अकेले शहर में 600 टन कचरा जमा है।

रोहतक : 12 जेसीबी और 60 सफाई कर्मचारियों के सहारे 150 ट्रॉली कचरा उठाया गया। इसका पता चलने पर सुबह 8:30 बजे कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए एक ट्राॅली कचरा जिला विकास भवन के सामने बिखेर दिया।

कैथल : 659 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। 600 टन कूड़ा जमा है। कूड़ा उठाने वालों के साथ चार बार हाथापाई हो चुकी है। सेक्टर-4 में ठेकेदार के कर्मचारियों को चूड़ी पहनाने व मुंह काला करने का प्रयास किया गया।

सोनीपत : यहां 358 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। 450 टन कूड़ा जमा है। हिंसा में डीसी तक घायल हो चुके हैं।

बरवाला : रविवार को जब ठेकेदार के कर्मचारियों से कचरा उठवाते हुए सफाई निरीक्षक सैनी पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में पहुंचे तो धरने पर बैठे कर्मचारियों में से किसी ने सफाई निरीक्षक अमीचंद सैनी पर काला तेल डाल दिया। मामले में अमीचंद सैनी ने पुलिस चौकी में कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दी है।

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