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बाजारों और कॉलोनियों में कचरे के ढेरों में लगा रहे आग दिन में दुर्गंध और रात को धुएं में सांस लेना हो रहा मुश्किल

3 वर्ष पहले
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बीते अाठ दिनों से जारी नगर निगमों, परिषदों और नगर पालिकाओं में कार्यरत कर्मचारियों की हड़ताल से शहर कचरे के ढेरों से अट गया है। टनों कचरा सड़कों पर सड़ रहा है। रही सही कसर रात को इसी कचरे में लगाई जा रही आग पूरी कर रही है। दिन में दुर्गंध और रात में धुएं के कारण लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।

उधर निकाय कर्मियों ने बुधवार को अपनी मांगाें काे लेकर सांसद आवास का घेराव कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और नियमित किए जाने की मांग की। कर्मचारियों की हड़ताल को सीटू जिला कमेटी भिवानी ने समर्थन करते हुए नगर परिषद से प्रदर्शन किया और सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। सांसद धर्मवीर सिंह ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की जो भी मांगे हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। सांसद ने बताया कि नप कर्मचारियों की मांगों को वे अपनी टिप्पणी सहित सीएम के पास भेजेंगे।

कृष्णा कॉलोनी मोड पर लगे कूड़े के ढेर में लगाई गई आग के कारण फैला धुआं।

अचानक शुरू नहीं हुई हड़ताल

हड़ताली कर्मचारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल को हड़ताली कर्मचारियों से मिलकर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। कर्मियों का कहना है कि हड़ताल अचानक शुरू नहीं हुई। पहले सभी जिला मुख्यालयों पर गेट मीटिंग, डीसी के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा गया। धरना और झाड़ू प्रदर्शन तक हुए। दो बार तीन-तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी दी गई। फिर भी प्रदेश सरकार और अधिकारियों ने निकाय कर्मियों की मांगों का नजरंदाज किया। आज भी सरकार उनकी मांगों के प्रति गंभीर नहीं है।

परेशान लोग अंधेरा हाेते ही कचरे में लगा रहे अाग

9 मई से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जगह -जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। अज्ञात लोग रात के अंधेरे में डस्टबिनों व कचरा स्थानों को आग के हवाले कर रहे हैं। इससे निकली दुर्गंध में सांस तक लेना दुभर हो रहा है। स्कूल आने जाने वाले बच्चों को भी कूड़ों के ढेर से होकर गुजरना पड़ रहा है। दूसरी आेर पुरुषों की बजाए महिलाएं मुंह कपड़े बांधकर घर से कचरे से भरा कट्टा स्कूटी से सड़कों पर छोड़कर जा रही हैं। रेस्टोरेंट व होटलों का कचरा रात में सड़कों पर फेंका जा रहा है।

जल्द कूड़ा नहीं उठा तो संक्रामक बीमारियों के फैलने का है खतरा

निकाय कर्मियों की 8 दिन से चली आ रही हड़ताल 17 मई तक बढ़ने से शहरवासियों का भी धैर्य टूटने लगा है। अब एक सप्ताह से घरों में रखा कूड़ा सड़कों, चौक-चौराहों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डालने से अामजन काे परेशानियाें से दाे चार हाेना पड़ रहा है। शहर के गली-मोहल्ले करीब 500 टन कचरे से सड़ रहे हैं। लिफ्टिंग व्यवस्था फेल हाेने से कूड़ा नप के डंपिंग जगह भी नहीं पहुंच रहा है। मोहल्लों व कॉलोनियों में अब संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो रहा है।

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