18 मई यानी आज का दिन पूरी दुनिया वर्ल्ड म्यूजियम-डे के रूप में सेलिब्रेट करती है। हमारा शहर भी एक ऐसा शहर है, जो विरासत के मामले में काफी समृद्ध है। म्यूजियम का मतलब जानकारियों और उनसे जुड़े ज्ञान को आगे बढ़ाना भी होता है। म्यूजियमाइजेशन ऐसा ही एक कॉन्सेप्ट है, जो चीजों को म्यूजियम में न ले जाकर उनकी जानकारी को उन्हीं की जगहों पर आगे बढ़ाया जाए। इस कॉन्सेप्ट का सबसे सटीक उदाहरण हैं लंदन में लंदन वॉल और रोम की हेरिटेज सिटी। भोपाल का रिच हेरिटेज और आर्किटेक्चर भी हमें ऐसे ही म्यूजियमाइजेशन का अहसास कराते हैं। हमने वर्ल्ड म्यूजियम-डे के अवसर पर शहर में ढूंढ़े, ऐसे 5 प्वाइंट्स, जहां म्यूजिमाइजेशन का स्कोप सबसे ज्यादा नजर आता है।
चौक
चौक की गलियाें में टब्बा मिया का महल, खजनची की हवेली.. जैसे कई सेठों के मकान हैं। यहां की हर गली का अपना एक इतिहास है। इनमें से कुछ गलियां विशेष काम से पहचानी जाती हैं, तो कुछ व्यंजनों के नाम से प्रसिद्ध हैं, जैसे मोढ़े वाली गली, जरी वाली गली जैसी कई गलियां यहां मौजूद हैं। इन विरासतों को फिर से वर्तमान पीढ़ी से रूबरू करा सकते हैं।
शाहजहांनाबाद
शाहजहांनाबाद में ताजमहल और तीन मोहरों की अपनी अलग कहानी हैं। इसकी सड़क को ठेले वाली सड़क के नाम से जाना जाता था। ताजमहल के ठीक पीछे भोपाल में परी बाजार लगा करता था, जिसे खूबसूरत ढंग से बताया जा सकता है कि शहर में महिलाओं के लिए, महिलाओं के द्वारा चलाया जाने वाला यह मार्केट कल्चर आखिर कैसा था।
सदर मंजिल
इकबाल मैदान जिसे खिरनी वाला मैदान भी कहते हैं, जो जीनत महल, शीश महल, सदर मंजिल से घिरा है। यहां एक ही जगह पर खड़े होकर आप फ्रेंच, इंडो-इस्लामिक और पर्शियन आर्किटेक्चर को देख सकते हैं। भोपाल में हर बेगम का कोई न कोई काम इस प्रिमाइसेज में देखने को मिलता है, जिसे बेहतर ढंग से भोपाल के लोगों को बताया जा सकता है।
जहांगीराबाद
सिकंदर जहां बेगम के पति जहांगीर मोहम्मद खां कुछ समय के लिए भोपाल के नवाब बने थे। उन्होंने भोपाल में मिलिट्री में बड़े बदलाव किए। उन्होंने मिलिट्री के लोगों के लिए अलग एक शहर बसाया, जिसे जहांगीराबाद कहा गया। मिलिट्री के सुधार, वॉटर लिफ्टिंग सिस्टम और दीवारों के ऊपर से पानी की सप्लाई जैसे जो प्रयोग यहां किए गए, उन्हें आकर्षक ढंग से दिखा सकते हैं।
मजबूत इच्छाशक्ति ही शहर को अलग पहचान दिलाएगी
शहर को सिर्फ म्यूजियम में नहीं दिखाया जाना चाहिए। हमारे शहर को चलते-फिरते लोगों से परिचित कराने का प्रयास किया जाए, तो शहर के लोगों और यहां के विजिटर्स में हैरिटेज सिटी की फीलिंग मजबूत होगी और शहर को एक अलग ढंग से पहचाना जा सकता है। म्यूजियमाइजेशन यानी विरासतों को उनकी ही जगह पर रहते हुए खूबसूरत ढंग से परिचित कराने का एक तरीका है। बोरिंग साइनेज अौर बोर्ड लोगों का ध्यान आकर्षित नहीं कर सकते, इसके लिए कुछ इनोवेटिव तरीकों का भी इस्तेमाल करना होगा।  - पूजा सक्सेना, आर्कियोलॉजिस्ट व म्यूजियमाइजेशन विषय पर यूके की विजिटिंग फेलो