पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को हमेशा से ही उपभोग की वस्तु समझा जाता रहा है। उसके साथ आवश्यकता की पूर्ति करने वाली वस्तु के समान व्यवहार किया जाता है। महिलाओं की स्थिति और पुरुष की मानसिकता पर तीखे प्रहार करते संवादों के बीच शुक्रवार को नाटक कोजनी कहां का मंचन जनजातीय संग्रहालय सभागार में हुआ। नाटक का मंचन अभिनयन श्रंृखला के तहत हुआ। नाटक का निर्देशन अन्नपूर्णा सोनी ने किया, जिसकी प्रस्तुति दर्पण रंग समूह के कलाकारों ने दी।
मप्र जनजातीय संग्रहालय में नाटक का मंचन
प्रगतिवादी सोच का दिखावा
नाटक की कहानी जुगुिन्त, चंपा, कलुआ और बुधुआ के सामाजिक और वैवाहिक जीवन के आसपास घूमती है। चंपा का पति बुधुआ बचपन में शादी हो जाने और काम के लिए बाहर चले जाने के कारण चंपा को प|ी नहीं स्वीकारता। वह दूसरी शादी कर लेता है। वहीं जुगुन्ति का पति कलुआ उसी की कमाई के पैसों से दारू पीता है और उसे बेतहाशा मारता-पीटता है। उसे शक है कि जुगुन्ति और मुखिया के बीच अवैध संबंध है। गांव का मुखिया रामखिलावन पूंजीवादी सोच से बाहर नहीं निकल पाया है। वह प्रगतिवादी सोच रखने का दिखावा करके लोगों पर अपना विश्वास और अधिकार बनाता है। नाटक समाज के दो अलग-अलग स्वरूप दिखाता है। जिसमें एक ओर महिला को देवी मान पूजा जा रहा, तो दूसरी ओर समाज उस पर अत्याचार भी करता है।