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100 साल पुरानी पुस्तकें और पाण्डुलिपियां

3 वर्ष पहले
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नर्मदा संरक्षण में अमूल्य योगदान देने वाले अमृतलाल बेगड़ , चिरंजीव लाल पालीवाल द्वारा संग्रहित की गईं पुस्तकें और पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने का जिम्मा अब माधवराव सप्रे संग्रहालय को मिला है। हाल ही में संग्रहालय को व्यक्तियों द्वारा संग्रहित की गई वर्षों पुरानी कृतियां सौंप दी गई हैं।

संग्रहालय की निदेशक डॉ. मंगला अनुजा ने बताया कि आगरा में 1915 में चिरंजीवी पुस्तकालय का निर्माण किया गया। चिरंजीव पालीवाल की मृत्यु के बाद इस संकलन का संग्रहण उनके बेटे विजयदत्त ने संभाला, लेकिन सेना में नौकरी के बाद संकलन को सहेजने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने यह संकलन सप्रे संग्रहालय को हाल ही में सौंपा। इसमें लगभग 5 हजार पुस्तकें और पाण्डुलिपियां शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर शुक्रवार को सप्रे संग्रहालय में यह विशेष कलेक्शन एग्जीबिट किया गया। इसमें भवानी प्रसाद की डायरियां, नारायण दत्त, अमृतलाल बेगड़ के संकलन को देखा जा सकता है। इसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, जिसमें उनके द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख है। इस अवसर पर यहां समाज में संग्रहालयों की भूमिका और महत्व विषय पर चर्चा हुई। जिसमें आयुक्त पुरातत्व अनुपम राजन ने कहा कि मप्र के सभी संग्रहालय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ आएंगे।

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