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गर्जन गाथा में मुखौटाें और काष्ठ कला से किया बाघ की कथाओं को अभिव्यक्त

3 वर्ष पहले
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गर्जन-गाथा का आयोजन विशेष रहा। वीथि संकुल में आयोजित इस प्रदर्शनी में बाघों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। गर्जन-गाथा भारतवर्ष के जनजातीय एवं लोकसमाजों द्वारा अनेकों कला-अभिव्यक्तियों के माध्यम जो यथा-चित्रकला, मुखौटे एवं काष्ठ-कला आदि से बाघ के दो व्यावहारिक पहलुओं ‘क्रोध एवं रुदन’ को प्रस्तुत करने की एक विनम्र प्रस्तुति है। यहां प्रदर्शित चित्रकला संग्रहालय द्वारा आयोजित एक कार्यशाला के दौरान परंपरागत कलाकारों द्वारा बाघ की कथाओं कीे अभिव्यक्ति की गई।

इस अवसर पर प्रो. मानवी सेठ ने हाइपर कनेक्टिविटी इन म्यूजियम्स-नीड्स एवं चैलेंजेस इन इंडियन कंटेक्स्ट विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान आधुनिक परिवेश में लोगों तथा समुदायों के बीच आपसी संवाद स्थापित करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए दुनियाभर के विविध संग्रहालय लोगों के साथ जुड़ने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ-साथ ऐसे दर्शकों को भी जोड़ना है जो कि आज भी संग्रहालयों से अछूते हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग माैजूद थे।

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