संघर्षों से जूझती स्त्री की कहानी \"रुदाली\'
सनीचरी। एक ऐसी महिला, जो शनिवार के दिन जन्मी और उसे यह नाम मिला। यही उसका कसूर बन गया, समाज उसे मनहूस और असगुनी मानने लगा। वह खुद भी यकीन करने लगती है इसमें और उसे लगता है कि उसके इस गुनाह के कारण ही उसके परिवार में कोई बचा नहीं। शहीद भवन में चल रहे भोजपाल नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन बुधवार को मंचित नाटक रुदाली की यही कहानी है।
केजी त्रिवेदी द्वारा निर्देशित इस नाटक की प्रस्तुति त्रिकर्षि नाट्य संस्था के कलाकारों ने दी। जिसका लेखन उषा गांगुली ने किया। नाटक एक ऐसी महिला (सनीचरी) की कथा है, जो पूरे जीवन भर संघर्षों से जुझती और लड़ती है। सास-ससुर, जेठ-जेठानी, यहां तक की अपने पुत्र की मृत्यु पर जिसने न विलाप किया न आंसू बहाए। चक्की का बिक जाना उसके जीवन की बड़ी वेदना बन जाती है। जब उसका पोता छोड़कर चला जाता है, तब बाल सखी बिखनी का मिलना उसके जीवन की क्षणिक खुशी है। रोटी के लिए रुदाली का व्यवसाय अपनाना और उसे पूरी ईमानदारी के साथ करना, इस चरित्र की प्रेरणादायक कहानी है।