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नया नेतृत्व| प्रदेश भाजपा की मौजूदा टीम को बदलने के मूड में नहीं नए प्रदेश अध्यक्ष

3 वर्ष पहले
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एक व्यक्ति, एक पद का सवाल

पॉलिटिकल रिपोर्टर | भोपाल

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के पास इस समय चार पद हो गए हैं। वे केंद्रीय भाजपा में संसदीय दल के चीफ व्हिप, जबलपुर से सांसद और महाराष्ट्र के सह प्रभारी होने के साथ अब मप्र भाजपा के अध्यक्ष भी बन गए हैं। पद संभालने के बाद जब उनसे पूछा गया कि पार्टी में एक व्यक्ति-एक पद का क्राइटेरिया है, लेकिन आपके पास तो चार पद हैं? जवाब में राकेश सिंह ने महाराष्ट्र के सह प्रभारी का पद छोड़ने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अब उनका फोकस मप्र रहेगा, इसलिए आने वाले समय में महाराष्ट्र सह प्रभारी का पद उनके पास नहीं रहेगा। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष के बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में एक से अधिक पदों पर बैठे नेताओं पर बाकी पद छोड़ने का दबाव बनेगा। इस समय कई पदाधिकारी ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक पद है।

एक से अधिक पदों पर बैठे दूसरे नेताओं पर भी होगा पद छोड़ने का दबाव

राकेश सिंह के पास हुए चार पद, कहा- महाराष्ट्र के सह प्रभारी का पद छोड़ेंगे

बदलाव के सवाल पर... जो लोग टीम में हैं, उन्हीं के साथ आगे बढ़ने के संकेत

मिठाई खिलाने की होड़- ये कैमरे का कमाल है। एंगल मिस होने से तस्वीर ऐसी आई। हुआ यूं कि राकेश सिंह, चौहान को मिठाई खिलाना चाह रहे थे, जबकि चौहान पहले उनका मुंह मीठा कराने की कोशिश में थे।

सवाल-जवाब.... उपचुनावों में जाे सीटें हम हारे, वो हमारी थी ही नहीं

पार्टी के ही नेता कह रहे हैं कि कार्यकर्ता निराश है, कैसे उन्हें मनाएंगे?

ऐसा मुझे किसी ने नहीं कहा। जो नेता मप्र दौरे पर आ रहे हैं, वो केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय प्रवास के कार्यक्रम हैं। कार्यकर्ता ऊर्जा से भरा है। नतीजे चुनावों में दिखेंगे।

नंदकुमार को हटाकर आपको लाया गया, क्यों बने ऐसे हालात?

नंदकुमार सिंह ने संसदीय क्षेत्र में काम करने की इच्छा जाहिर की थी। वे तीन-चार बार पहले भी कह चुके थे। उन्हें हटाया नहीं गया। जहां तक मुझे जिम्मेदारी देने का सवाल है तो मुझसे अधिक क्षमतावान लोग पार्टी में अब भी हैं, लेकिन जिम्मेदारी तो किसी न किसी एक व्यक्ति को ही मिलती है।

लगातार उपचुनाव हार रहे हैं, इस एंटी इनकंबेंसी से कैसे निपटेंगे?

जो सीटें हारे हैं, वो हमारी थी ही नहीं। हमने तो कांग्रेस के वोटों का प्रतिशत घटा दिया। वैसे भी लोकतंत्र में सारे चुनाव सत्तापक्ष नहीं जीत सकता। जहां तक एंटी इनकंबेंसी का सवाल है तो न तो पीएम नरेंद्र मोदी के होते केंद्र सरकार में और न सीमए शिवराज सिंह के होते मप्र में एंटी इनकंबेंसी हो सकती है।

क्या नंदकुमार चौहान की टीम भंग होगी?

नहीं। जो लोग हैं, उन्हीं के साथ आगे बढ़ेंगे। जातियों में बढ़ रही दूरियों से कैसे निपटेंगे?

यह गंभीर विषय है। हम सबको भाई-बहन के रूप में देखते हैं। मोदी जी ने कहा भी है कि सबका साथ-सबका विकास।

इंतजार करते रहे राकेश सिंह

राकेश सिंह का पदग्रहण कार्यक्रम दोपहर 12.30 बजे पार्टी दफ्तर में रखा गया। वे तब तक भेल गेस्ट हाउस में रुके थे। सीएम तब तक नहीं पहुंचे थे। लिहाजा सिंह गेस्ट हाउस में ही रुके रहे। जानकारी मिलने पर उन्हें नंदकुमार सिंह के निवास लाया गया। करीब ढाई बजे सीएम भी वहां पहुंचे और फिर तीनों साथ में 3 बजे पार्टी कार्यालय आए।

ड्राइवर में कमी थी, इसलिए बदला

पार्टी दफ्तर में राकेश सिंह के पदभार कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने कहा कि भाजपा संगठन की गाड़ी सही चल रही थी। ड्राइवर में कुछ कमी थी, इसलिए अध्यक्ष पद पर बदलाव हुआ है।

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