सामाजिक न्याय विभाग ने निरस्त किया 28 साल पुराना फर्जी आदेश
सामाजिक न्याय विभाग में 28 सालों से प्रचलन में चले आ रहे एक फर्जी आदेश को निरस्त कर दिया है। विभाग में बीते दो दशकों से ज्यादा समय से अधिकारी-कर्मचारियों की रिटायरमेंट की आयु 62 वर्ष चली आ रही थी, जबकि उस दौरान यानी 1990 में कर्मचारियों की रिटायरमेंट की आयु ही 58 साल थी। यह आदेश जुलाई 2017 में विभाग के पकड़ में आ गया था, तब प्रमुख सचिव ने इसे निरस्त करने के लिए मंत्री को लिखा, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले को कांग्रेस के आरटीआई विभाग के प्रमुख अजय दुबे ने प्रमुख रूप से मीडिया के सामने रखा था। इसके बाद हरकत में आई सरकार ने बुधवार को इस आदेश को निरस्त कर दिया है।
सेवानिवृत्ति संबंधी आदेश निरस्त किए जाने के बाद दुबे का कहना है कि राज्य सरकार को इस आदेश को जारी करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराना चाहिए। यदि सरकार मुकदमा दर्ज नहीं कराती है तो इस पर वे कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।