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आरजीपीवी रजिस्ट्रार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू

3 वर्ष पहले
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राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के रजिस्ट्रार प्रो. एसके जैन के खिलाफ शासन ने दो अलग-अलग विभागीय जांच शुरू कर दी है। प्रो. जैन के खिलाफ लगभग आठ बिंदुओं पर जांच होनी है। पहली जांच में उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज मेें प्राचार्य रहते नियम विरुद्ध तरीके से फेकल्टी को पीएचडी इंक्रीमेंट देने का आरोप है। वहीं दूसरी जांच आरजीपीवी में रजिस्ट्रार रहते पिछले वर्षों में की गई विभिन्न लापरवाही से जुड़ी है। जिसमें मुख्य रूप से करीब पांच लाख छात्रों को डेड़ साल तक अंकसूची नहीं मिलने का आरोप है। इसके अलावा 65 हजार छात्रों को समय पर डिग्री नहीं मिलने से हायर एजुकेशन व नौकरी से वंचित होने का आरोप है।

शासन ने इन दोनों मामलों आरजीपीवी के सचिव डॉ. अरुण नाहर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उधर, रजिस्ट्रार प्रो.जैन ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। शासन को पत्र लिखकर कहा है कि उन पर लगाए आरोप के संदर्भ में कई बार दस्तावेज मांगे जाने पर भी उपलब्ध नहीं कराए गए और बिना पक्ष सुने जांच कराने के आदेश जारी कर किए गए। इसे रजिस्ट्रार ने उनके कॅरियर को खराब करने की एक सोची समझी साजिश एवं कूटरचित होना बताया है। रजिस्ट्रार ने पत्र में कहा है उनके खिलाफ की जा रही जांच से जुड़े दस्तावेज नहीं दिए जाते हैं तो मजबूरन न्यायालय में याचिका दायर करनी पड़ सकती है।

रजिस्ट्रार पर लगे आरोप

सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना स्वयं मुद्रित कर जारी करने की अनुमति एमआईटीएस-ग्वालियर कोे दी गई।

आठ माह पूर्व सभी स्वीकृति होने के उपरांत भी प्रिंटिंग आदेश नहीं दिया जिससे विवि के छात्र-छात्राओें को दो वर्ष तक मार्कशीट नहीं मिल सकी। कुलपति द्वारा अनुमोदन के बाद भी सिक्यूरिटी सर्विसेस की निविदा निरस्तीकरण का आदेश जारी नहीं किया जिससे विवि को वित्तीय हानि उठानी पड़ी। वॉयवा के लिए नियुक्त किए गए एक्सटर्नल व सुपरवाइजर के मानदेय व यात्रा भत्ता की नस्ती पर अवांछनीय टीप लिखी गई। पूर्व कुलपति के आदेशों की अवहेलना कर विवि की छवि धूमिल की गई। एक वर्ष में लगभग 65 हजार छात्र-छात्राओं की डिग्रियां तैयार की गईं थीं। लेकिन कंटेनर न होने के कारण डिस्पैच नहीं हो सकीं। जिससे छात्रों को हायर एजुकेशन व नौकरी से वंचित होना पड़ा। राज्यपाल के प्रमुख सचिव के पत्र के अनुसार रजिस्ट्रार ने उनसे सीधे पत्राचार कर विवि के अधिनियमों का उल्लंघन किया, जिसमें प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। रजिस्ट्रार द्वारा रैक्टर पद पर प्रो.मुकेश पाण्डेय को नियुक्त करने के निर्णय के बाद उनके दायित्वों को लेकर मार्गदर्शन मांगा था। विवि के शिक्षक एवं अधिकारियों की कैश, आश्रितों की आर्थिक सहायता, कंप्यूटर, स्टेशनरी व दैनिक कार्यों से संबंधित नस्तियों को वाधित करने संबंधी कार्य किए गए।

आरोप गंभीर हैं

रजिस्ट्रार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है। आरोप गंभीर हैं। इसके लिए डॉ. अरुण नाहर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। सभाजीत यादव, उपसचिव तकनीकी शिक्षा

सभी आरोप निराधार

मुझे पर जो भी आरोप लगाए गए हैं वे सभी निराधार और असत्य हैं। विवि की हर प्रक्रिया के लिए रजिस्ट्रार दोषी कैसे हो सकता है। इस संबंध में शासन स्तर पर जवाब दूंगा। इसलिए विभाग से दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रो.एसके जैन, रजिस्ट्रार आरजीपीवी

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