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फिल्म में दिखा जमींदारी और सामंतवाद का पतन

3 वर्ष पहले
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भारत भवन में आयोजित फिल्म समारोह में सोमवार को फिल्म ‘साहिब बीबी और गुलाम’ का प्रदर्शन किया गया। अबरार अल्वी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में मीना कुमारी, गुरुदत्त, रहमान, वहिदा रहमान, नासिर हुसैन आदि ने प्रमुख किरदारों की भूमिका निभाई। 1962 में रिलीज हुई इस फिल्म में संगीत हेमंत कुमार और शकील बदायूनी ने दिया। फिल्म बिमल मित्रा द्वारा लिखे गए एक बंगाली उपन्यास पर आधारित है और ब्रिटिश राज के दौरान 11वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में बंगाल में जमींदारी और सामंतवाद के दुखद पतन की झलक है।

फिल्म एक कुलीन साहिब की एक सुंदर अकेली प|ी, बीबी और एक कम आय वाले अंशकालिक दास (गुलाम) के बीच एक आदर्शवादी दोस्ती को दर्शाने की कोशिश करती है।

फ्लेशबैक में चलती है पूरी कहानी

फिल्म वर्तमान से शुरू होती है। कई वर्ष बीत चुके होते हैं और अब अधेड़ उम्र का अतुल्य चक्रवर्ती उर्फ भूतनाथ जो कि एक वास्तुकार है अपने कर्मचारियों के साथ एक हवेली के खंडहरोंं को गिराकर एक नई इमारत का निर्माण करने जा रहा है। उन खंडहरो को देखकर उसे पुराने दिनों की याद आ जाती है। इस बीच फिल्म फ्लैशबैक में चली जाती है और भूतनाथ गांव से कोलकाता नौकरी की तलाश में अपने मुंह बोले बहनोई के यहां जाता है। यहां इसी हवेली के मुलाज्मिों की रिहाइशगाह में रहता है। यह हवेली शहर के बड़े जमीनदार चौधरी खानदान की है। फिल्म देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

Film Show

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