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आदिवासी मान्यतानुसार घर के बाहर दीवार पर टंगा हुआ मुखौटा रोकता है परेशानियां

3 वर्ष पहले
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गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को को-करिकुलर एक्टिविटी में शामिल होना न सिर्फ उनकी कलात्मकता को नया प्लेटफॉर्म देता है, बल्कि बच्चों को उस कला को समझने और जानने का अवसर भी मिलता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर इन दिनों गांधी भवन के अर्घ्य कला प्रेक्षागृह में मुखौटा कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें उज्जैन से आए मुखौटा कलाकार गयूर कुरैशी बच्चों को मुखौटा बनाने की विधियां और उससे जुड़ी तकनीकी जानकारी दे रहे हैं। वर्कशॉप में 35 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। वर्कशॉप के तहत प्रतिभागियों को कच्चे मटेरियल से मुखौटा बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यशाला में एक्सपर्ट द्वारा अलग-अलग प्रकार के मुखौटे बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सीखा पगड़ी बनाने और उसे सही ढंग से बांधने का तरीका

कलाकार गयूर ने बच्चों को पगड़ी बनाने की विधि और उसे बांधने का तरीका सिखाया गया। इसमें उन्होंने बताया कि पगड़ी बनाने के दौरान रद्दी पेपर, वेस्ट साड़ी, चुनरी आदि से कलरफुल पगड़ी तैयार की जाती है। 24 जून तक चलने वाली इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को राजा महाराजाओं, समेत देवी-देवताओं आदि की पगड़ी बनाना सिखाया जाएगा।

कुछ ऐसी हैं मान्यताएं

गयूर ने बच्चों को बताया कि भारत के राजा-महाराजाओं, रानियां और देवी-देवताओं के अलावा घर को नजर से बचाने के लिए मुखौटा का निर्माण किया जाता है। वहीं आदिवासी परंपरा के अनुसार मुखौटे घर को बुरी नजर से बचाते हैं और घर के बाहर दीवार पर लगा मुखौटा घर में आने वाली सभी प्रकार की परेशानियों को रोकने का काम भी करता है।

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