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स्टाम्प की राशि कम चुकाने पर एक दिन में मिलने वाली रजिस्ट्री 15 दिन में मिलेगी
यदि आप रजिस्ट्री कराने जा रहे हैं और सर्विस प्रोवाइडर ने गलती से कलेक्टर गाइडलाइन की गणना ठीक से नहीं की तो आपकी रजिस्ट्री अटक जाएगी और रजिस्ट्री पाने के लिए संबंधित प्रॉपर्टी के खरीदार को महीनों इंतजार करना पड़ेगा। लोगों की सुविधा के लिए शुरू की गई ई-रजिस्ट्री की इस व्यवस्था से लोगों की मुसीबत बढ़ जाएगी। अफसरों ने सिर्फ अपनी सुविधा के लिए ऐसे नियम बना दिए हैं। पहले सब रजिस्ट्रार के पास अधिकार थे कि कलेक्टर गाइडलाइन से कम पर रजिस्ट्री मिलने पर बकाया स्टाम्प शुल्क की राशि तत्काल जमा करा ली जाती थी। लेकिन अब नए नियम के बाद ऐसा नहीं होगा। बल्कि व्यक्ति को 10 से 15 दिन तक इंतजार करना होगा। इसमें भी यदि अफसरों ने कोई पेंच फंसा दिया तो महीनों तक लोगों को रजिस्ट्री प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
साथ ही यदि व्यक्ति जिला पंजीयक के नोटिस देने के एक महीने के भीतर उपस्थित नहीं होता है तो संबंधित बकाया राशि पर हर माह दो प्रतिशत ब्याज चुकाना होगा। इतना ही नहीं यदि मकान है और उपभोक्ता प्लॉट बताकर रजिस्ट्री करा लेता है तो ई-रजिस्ट्री के बाद स्पॉट वेरीफिकेशन में जो भी अंतर होगा, वह ब्याज समेत चुकाना पड़ेगा।
कलेक्टर गाइडलाइन से कम पर रजिस्ट्री हुई तो महीनेभर में देना होगा बकाया, वर्ना हर माह लगेगा 2% ब्याज
स्टाम्प अधिनियम की धारा 35 (च) खत्म हाेने के चलते बनी ऐसी स्थिति
भारतीय स्टाम्प (मप्र) संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया गया है। राज्य सरकार ने पिछले साल भारतीय स्टाम्प (मप्र) संशोधन विधेयक को विधानसभा से पारित करवाकर स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा था। उनकी स्वीकृति के बाद जारी किए गए राजपत्र स्टाम्प अधिनियम की धारा 35 (च) खत्म कर दिया गया। इस धारा के तहत 1986 से पंजीयन विभाग में होने वाली रजिस्ट्री में कम स्टाम्प शुल्क मिलने पर सब रजिस्ट्रार द्वारा प्रॉपर्टी के खरीदार से तत्काल स्टाम्प ड्यूटी की गणना कर उसे जमा कराया जाता था। इस प्रक्रिया के बाद रजिस्ट्री खरीदार को सौंप दी जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसकी वजह सरकार द्वारा धारा 35 (च) खत्म करना है। अब रजिस्ट्री कराने के दौरान यदि भूलवश कोई सर्विस प्रोवाइडर स्टाम्प की गणना कम कर देता अौर जमीन का रिकॉर्ड लिखने में गलती करता है तो प्रॉपर्टी के खरीदार की मुश्किल बढ़ जाएगी।
...तो सब रजिस्ट्रार रजिस्ट्री जब्त कर जिला पंजीयक के पास भेज देंगे
उदाहरण के तौर पर अफसरों ने बताया कि कान्हासैंया निवासी महेश मीना ने 1000 वर्गफीट पर बना मकान 11 लाख 95 हजार रुपए खरीदा था। जबकि कलेक्टर गाइडलाइन में इसका बाजार मूल्य 12 लाख रुपए होता है। सर्विस प्रोवाइडर द्वारा यदि खरीदे गए मकान का बाजार मूल्य सही नहीं निकाला गया और डीड तय स्टाम्प ड्यूटी के स्टाम्प नहीं लगाए गए तो बकाया 5 हजार रुपए जमा करने के लिए सब रजिस्ट्रार संबंधित रजिस्ट्री को जब्त कर जिला पंजीयक के पास भेज देगा। जबकि पहले की व्यवस्था में यह 5 हजार रुपए तत्काल जमा करा के रजिस्ट्री करने के अधिकार सब रजिस्ट्रार के पास थे। इस व्यवस्था में लोगों के समय की बचत होती थी। साथ ही परेशानी भी नहीं होती थी।
ई-रजिस्ट्री में दिक्कत हो तो
हेल्पलाइन पर करें पूछताछ
ई-रजिस्ट्री में दिक्कत होने पर टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002333842 पर कॉल करके पूछताछ कर सकते हैं। ईमेल आईडी sampadahd@gmail.com पर भी शिकायत कर सकते हैं।