दो कश्तियों पर सवार हुस्नआरा और लक्कड़ खां के साथ शेरमार
कलाकारों की वेशभूषा, संवाद अदायगी और परफेक्ट टाइमिंग ने दर्शकों को हंसने के कई मौके दिए।
सिटी रिपोर्टर | भोपाल
हुस्नआरा अपने भाई हुस्नअली के रूप में भोपाल की एक सराय में रहती है। वहीं दूसरे कमरे में लक्कड़ खां नाम का युवक रहता है। ये दोनों पुराने प्रेमी हैं। सराय का नौकर शेरमार दोनों के पास नौकरी करता है। दोनों शेरमार पर भरोसा करके उसे अपने निजी खत, फोटोग्राफ्स और संदूक संभालने को देते हैं।
शेरमार दोनों का सामान मिला देता है। इससे हुए कंफ्यूजन से हुस्नआरा और लक्कड़ खां की डायरी, फोटो एक-दूसरे को मिल जाते हैं और वे दोनों भी। दरअसल ये पटकथा \\\"दो कश्तियों पर सवार\\\' नाटक की, जो रवींद्र भवन में आयोजित 28वें इफ्तेखार नाट्य समारोह में मंगलवार को मंचित हुआ। गोपाल दुबे निर्देशित यह नाटक, कार्लो गोल्दानी की रचना है। डायलॉग्स की टाइमिंग और अभिनय ने लोगों को बहुत हंसाया। इसका मंचन कॉमेडिया डेल आर्ट शैली में हुआ। यह विशेष प्रकार की नाट्य शैली है, जिसे इटली के महान नाटककार कार्लो गोल्दोनी ने विकसित किया था।