समाज में उच्च वर्ग की दमनकारी नीतियों को उजागर करता है \"द फेयर लेडी\'
शहीद भवन में चल रहे भोजपाल नाट्य महोत्सव में मंगलवार को नाटक द फेयर लेडी का मंचन हुआ। दिनेश नायर निर्देशित इस नाटक की प्रस्तुति रंग माध्यम के कलाकारों ने दी। इसमें दिखाया कि काले-गोरे, अमीरी-गरीबी जैसी सामाजिक विसंगतियों की खाई अब भी गहरी है। आज भी लोग उच्च और निम्न वर्ग में बंटे हुए हैं। समाज का एक हिस्सा जहां मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है, वहीं एक वर्ग दमनकारी नीति अपनाकर तमाम सुविधाओं के साथ सर उठाए जी रहा है।
वास्तविकता के करीब है
सन 1946 में ज्या पाल सार्त्र का लिखा यह फ्रांसीसी नाटक आज भी वास्तविकता के काफी करीब है। नाटक में अमेरिकन इतिहास के प्रजातीय तनाव के काल में एक ऐसी औरत का चित्रण है, जो नाइट क्लब में गायिका और मेजबान है। सामाजिक वर्ग के संदर्भ में यह नाटक एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है कि कैसे उच्च वर्ग अपनी भ्रांति और अर्द्धसत्य के बावजूद अपने उद्देश्य को प्राप्त कर लेता है। कैसे सत्ताधारी उच्च वर्ग, निम्न वर्ग पर नियंत्रण करता है। कलाकारों के दमदार अभिनय और संवादों ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया।
कलाकारों के बेहतरीन अभिनय से नाटक के विभिन्न दृश्य जीवंत बन उठे।