मिट्टी के घरों को वारली चित्रकला से सजाते हैं इस समुदाय के लोग
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में मंगलवार से करो और सीखो वर्कशॉप में वारली चित्रकला प्रशिक्षण की शुरुआत हुई। 22 मई तक चलने वाली इस वर्कशॉप में महाराष्ट्र से आए विशेषज्ञ दिलीप और मिताली प्रतिभागियों को वारली पेंटिंग की बारीकियां सिखा रहे हैं। पहले दिन यहां वारली पेंटिंग के बेसिक फिगर्स और आकार के बारे में जानकारी दी गई।
क्या है वारली चित्रकला
महाराष्ट्र वारली लोक चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है। वारली एक जनजाति है, जो पश्चिमी भारत के मुंबई शहर के उत्तरी बाह्मंचल में बसी है। 1970 की शुरुआत में पहली बार वारली कला के बारे में पता चला। इन पेंटिंग्स में वारली जनजाति की रोजमर्रा की जिंदगी और सामाजिक जीवन का सजीव चित्रण होता है। यह चित्रकारी वे मिट्टी से बने अपने कच्चे घरों की दीवारों को सजाने के लिए करते हैं। लिपि का ज्ञान नहीं होने से लोक वार्ताओं व लोक साहित्य को आम लोगों तक पहुंचाने को यही एकमात्र साधन था।