आज की व्यस्त दिनचर्या के दौर में तनाव से मुक्त होने के लिए हर कोई उपाय कर रहा है। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय अभी तक लोग योगा को ही मानते आए हैं, लेकिन अब तनाव मुक्ति के लिए एक पद्धति सामने आई है, जिसे रैकी कहते हैं। यह पद्धति बच्चों को परीक्षा से मुक्त रखने के साथ ही टॉपर के बीच स्थान दिला सकती है।
यह कहना है राजधानी के रैकी टीचर अखिलेश जोशी व विजय मारवाह का जो पिछले 15 साल से तनाव मुक्त रहने के लिए हर आयु वर्ग के लोगों को मुफ्त में प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके मुताबिक मात्र दो दिन में रैकी को सीखा जा सकता है, जिससे बच्चे भी परीक्षा व पढ़ाई के तनाव से मुक्त होकर राहत महसूस कर सकते हैं। उन्होंने हाल ही में मुम्बई से आईआईटी कर तन्मय को इसकी ट्रेनिंग दी। तन्मय पढ़ाई में शुरू से अच्छे रहे हैं।
हर तनाव से मुक्त रखती है रैकी की स्पर्श पद्धति, रैकी के माध्यम से स्वयं के स्पर्श के द्वारा शरीर व मन को किया जाता है नियंत्रित
बुजुर्ग गजेंद्र को मिली राहत
अखिलेश व विजय के अनुसार रैकी टीचर कभी भी दवा बंद करने के लिए नहीं कहते, लेकिन रैकी करने से राहत मिलने का विश्वास दिलाते हैं। अभी हाल ही में 80 वर्षीय बुजुर्ग गजेंद्र कुमार काफी समय से पार्किंसंस से परेशान हैं, लेकिन स्वयं ही रैकी की स्पर्श पद्धति अपनाकर वह काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
क्या है रैकी
रैकी टीचर अखिलेश जोशी व विजय मारवाह के अनुसार यह पद्धति जापानी है, जिसकी डाॅ. मिकाओसी ने खोज की थी। इसमें स्वयं के स्पर्श के द्वारा शरीर व मन को बैलेंस किया जाता है। इस पद्धति को 10-12 साल बच्चों से लेकर 80-90 साल आयु वर्ग के बूढ़े भी अपना सकते हैं। अपने शरीर में शक्तिवाद के चक्रोश व ब्रह्माणी शक्ति, जिससे शरीर चलता है में कमी आ सकती है। स्वयं के स्पर्श से इस शक्ति को वापस लाया जा सकता है या दूसरे को भी लाभ पहंुचाया जा सकता है।
पेरेंट्स अपने बच्चों को परीक्षा के तनाव से मुक्त रखने सीखें रैकी
विजय के अनुसार परीक्षा को लेकर आजकल बच्चों में काफी तनाव देखा जा रहा है। इस तनाव से बच्चों को मुक्त रखने के लिए पेरेंट्स को रैकी सीखना चाहिए। अभी हाल ही में उन्होंने कुछ बच्चों पर इसका प्रयोग किया और काफी सफल रहा है। बच्चा जब भी तनाव में हो तो पेरेंट्स गुस्सा व तनाव मुक्त करने बच्चों को सिर पर स्पर्श करें।