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देश सेवा का था जज्बा, मेहनत की और बने आर्मी ऑफिसर

3 वर्ष पहले
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मुझे बचपन से ही देश के लिए कुछ अलग करने का जज्बा मन में था। बस मैंने अपने आपको और माता-पिता को किसी तरह मनाया और देश के लिए खून, पसीना और मेहनत करने वाले रास्ते पर जाने का फैसला लिया। ये कहना है आर्मी में कैप्टन मो. यूनुस खान का। वे राजस्थान के सूरतगढ़ में पदस्थ हैं। इन दिनों वे भोपाल में हैं। सिटी प्लस भास्कर से उन्होंने खास बातचीत की।

बकौल यूनुस मुझे बचपन से ही देश के लिए कुछ करने का जुनून था। भेल क्षेत्र के जवाहर स्कूल से हायर सेकंडरी की परीक्षा पूरी करने के बाद बीई इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्राॅनिक्स से पूरी की। इसी दौरान कैंपस सिलेक्शन जानी-मानी साफ्टवेयर कंपनी में हो गया। परिवार के लोग बेहद खुश थे, लेकिन मे मन अंदर ही अंदर इस नौकरी के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने बताया कि फाइनल ईयर की परीक्षा पास होने के बाद सीडीएस की परीक्षा में बैठे। उसमें भी वे कामयाब हुए और इंडियन मिलेट्री अकादमी में डेढ़ साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लेफ्टीनेंट के पद पर पदस्थ हुए।

देश सेवा का जुनून

राजस्थान के सूरतगढ़ में आर्मी में पदस्थ कैप्टन भोपाल के मो. युनूस खान से भोपाल पोस्ट की खास बातचीत

पिता को है बेटे की कामयाबी पर गर्व

मो. युनूस खान के पिता मेहफूज अली खान भेल के आईटी विभाग में एडिशनल ऑफिसर के पद से 2011 में रिटायर हुए। बेटे की उपलब्धि पर वे कहते हैं कि मुझे ही नहीं, बल्कि मेरे पूरे परिवार को गर्व है।

दो साल बाद बन गए कैप्टन

नौकरी के दौरान ही उन्होंने कई प्रोफेशनल और एडवेंचर कोर्स भी किए। दो साल की नौकरी के बाद वे कैप्टन बन गए। 26 जनवरी 2018 को राजपथ पर आर्मी के कंटीनजेंट को लीड किया और आर्मी चीफ से अवाॅर्ड लिया।

तो छलक आए थे आंसू

युनूस ने बताया कि डेढ़ साल की मुश्किल भरी ट्रेनिंग के बाद जब उनके कंधों पर स्टार लगा तो समारोह में मौजूद उनके माता-पिता की आंखों से आंसू छलक आए थे।

पापा से कहा था मेहनत करूंगा, फिक्र न करें

यूनुस ने बताया आर्मी में सिलेक्शन होने के बाद जब वे फील्ड में जा रहे थे तब माता-पिता के माथे पर चिंता की लकीरें थीं, मैंने पिता से कहा मेहनत करूंगा, फिक्र न करें।

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