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बस पास रिन्यू न होने से महंगी पड़ रही यात्रा

3 वर्ष पहले
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लो फ्लोर और मिडी बसें तो कई चलाई गई हैं, लेकिन ये समय पर चलती नहीं है। इनके पास बनाने की व्यवस्था में भी कई खामियां हैं। अब तक 33 बस स्टॉप पर ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन मशीनें लगाई गई हैं। लेकिन ट्रेंड कर्मचारी न होने के कारण पास नवीनीकरण में दिक्कत आ रही है। इस वजह से पासधारकों को भी रोजाना किराया चुकाकर सफर करना पड़ रहा है। यह वेतन भोगियों और दिहाड़ी मजदूरों को भारी पड़ रहा है।

डीबी स्टार भोपाल

लो-फ्लोर बसों में यात्रा करने वाले विभिन्न वर्गों के व्यक्तियों के लिए रियायती दरों पर स्मार्ट पास बनाए गए हैं। आम नागरिकों के 800 और स्टूडेंट के स्मार्ट पास 400 रुपए प्रतिमाह में बनाए जाते हैं। राज्य शासन के कर्मचारी, वरिष्ठ नागरिक एवं घरेलू कामकाजी महिलाओं के मंथली पास 600 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से बनाए जाते हैं। इन पास को रिन्यू करने के लिए बस स्टाॅप पर आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। मगर ट्रेंड कर्मचारी न होने के कारण पासधारियों को भी अपने पास रिन्यू कराने में दिक्कत आ रही है।

नगर निगम और बीसीएलएल द्वारा शहर के विभिन्न मार्गों पर लगभग 205 लो-फ्लोर बसें चलाई जा रही हैं। इनमें से 20 बसें एसी हैं। इनके अलावा 62 मिडी बसों का संचालन भी किया जा रहा है। 40 मिडी बसों को शहर की सड़कों पर और उतारा जाएगा। इस तरह 102 मिडी बसें दौड़ने लगेंगी। वर्तमान में बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या लगभग 1 लाख 65 हजार प्रति दिन हैं।

बीआरटीएस कारीडोर के अंदर निर्मित 77 में से 33 बस स्टाॅप पर यात्रियों की सुविधा के लिये आटोमैटिक फेयर कलेक्शन (एटीवीएएम) मशीन स्थापित की गई है। इनके अलावा पास रिन्यू करने के लिए भी मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से यात्री टिकट क्रय कर बसों में सफर करते हैं। जहां मशीनें नहीं लगी हैं, वहां से यात्री बस में सवार होने के बाद टिकट लेते हैं। नियमित सफर करने वाले यात्री मंथली पास बनवाते हैं। समय-समय पर पास रिन्यू न होने के कारण उन्हें भी टिकट लेकर सफर करना पड़ रहा है, जो मेहनत-मजदूरी करने वालों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। अपनी यह पीड़ा वे निगम और बीसीएलएल के अफसरों को भी बता चुके हैं। लेकिन अब तक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है।

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मशीन हेंग होने की शिकायतें हैं

 यदा-कदा मशीन हेंग होने की शिकायतें मिली हैं। इस वजह से महापौर स्मार्ट पास रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। पहले यात्रियों को पास रिचार्ज करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। लेकिन जब से मशीन लगाई गई हैं, तब से यात्रियों को काफी सुविधा हो गई है। पहले चरण में 33 मशीन लगाई गई थी। दूसरे चरण में 42 मशीन और लगाई जाएंगी। असामाजिक तत्वों द्वारा मशीनों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें मिली हैं। आमतौर पर हम यात्रियों की शिकायतों का तुरंत समाधान करने की कोशिश करते हैं। संजय सोनी, जनसंपर्क अधिकारी, बीसीएलएल, भोपाल

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