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वर्णम में शिव के प्रति नायिका के प्रेम का किया खूबसूरत बखान

3 वर्ष पहले
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जनजातीय संग्रहालय में रविवार को उत्तराधिकार शृंखला में संगीत की दो सभाएं हुईं। समारोह में कोलकाता से आईं अम्बाली प्रहराज ने भरतनाट्यम की जुगलबंदी पेश की। इस प्रस्तुति में उन्होंने अपनी साथी नृत्यांगनाओं के साथ भरतनाट्यम की परंपरागत प्रस्तुति से कलाप्रेमियों को परिचित कराया। शुरुआत मिश्र झप ताल में अलारिपु से की, जिसमें उन्होंने हाथ में फूल लेकर नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना की। इसके बाद आदिताल में निबद्ध बंदिश की प्रस्तुति में नृत्य भाव और हस्त मुद्राओं से प्रस्तुति को प्रभावी बनाया। फिर आदिताल में वर्णम पर नायक शिव के प्रति नायिका के प्रेम का बखान करता है। आगे उन्होंने तृषा त्रुपुट ताल में पदम पर आधारित कृष्ण और रुक्मिणी के रूपों को नृत्य में पिरोया। प्रस्तुति का समापन परंपरानुसार तिल्लाना के साथ हुआ। नृत्य में काव्या, प्रणव दास, अरिजीत और अतनु दास ने सहयोग किया।

अंशुल-उदय का तबला वादन

नृत्य प्रस्तुति से पूर्व युवा तबला वादक अंशुल प्रताप सिंह ने उदय प्रताप सिंह के साथ तबला पर जुगलबंदी पेश की। इसमें उन्होंने तीन ताल विलंबित लय में बनारस घराने की उठान, रेला, टुकड़े, साधारण परन, चक्करदार परन आदि को पेश किया।

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