प्यासा हिंदी सिनेमा की महानतम फिल्मों में से एक है। जब तक हमारा सिनेमा सांस लेता रहेगा प्यासा अमर रहेगी। जहां दुनिया को ठुकराने वाले बेचैन नायक गढ़े जाएंगे प्यासा फिल्मकारों की पाठशाला बनेगी। गुरूदत्त अभिनीत और निर्देशित फिल्म प्यासा का प्रदर्शन रविवार को भारत भवन में आयोजित गुरूदत्त पर एकाग्र फिल्म समारोह में हुआ। 1957 में तैयार हुई इस फिल्म में माला सिन्हा, वहीदा रहमान, जॉनी वॉकर, लीला मिश्रा, आदि प्रमुख किरदारों में दिखाई दिए। फिल्म में विजय नामक संघर्षरत कवि की कहानी है जो स्वतंत्र भारत में अपने कार्य को प्रकाशित करना चाहता है। फिल्म में संगीत एसडी बर्मन का है।
असफल कवि है विजय
विजय एक असफल कवि है जिसका कार्य प्रकाशक का है, वहीं उसका भाई उसकी कविताओं को बेकार के कागजों में बेचता है। निकम्मा होने का ताना न सुनना पड़े इस वजह से वह ज्यादातर समय बाहर ही रहता है। वो गुलाबो नामक एक महिला से मिलता है जो उसकी कविताओं से प्रभावित है और उससे प्रेम करने लग जाती है।