हिंदी भवन में रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रभात साहित्य परिषद की ओर से आयोजित इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता महेश प्रसाद सिंह ने की। और कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजेंद्र शर्मा थे। इसके बाद काव्य गोष्ठी में रमेश नंद ने ख्वाबों में मेरे रात-दिन वो ऐसे आ रहे हैं कि हो गया जीना कठिन कहीं भी मन नहीं लगता है..., का पाठ किया। इसके साथ ही डॉ. अनिल शर्मा ने बड़ी शिद्दत से दुनिया, नाम लेती है.., का पाठ किया। महेश प्रसाद सिंह ने अपनी रचना सुनाई। इसके बाद डॉ. विमल शर्मा ने जब से उसने फेर ली मुझसे नजर मुझको तन्हाई में जीना आ गया.., सुनाया। नम्रता शर्मा ने अपनी जमीं अपना आसमां अलग रखती हूं, मैं अपने जीने का अंदाज अलग रखती हूं…, को सुनाया। अंत में अरुणा पाटिल ने जीना किसको कहते हैं आज किसी को पता नहीं…, को सुनाया।