सच्ची कला वास्तव में वही है जो उसके रचयिता कलाकार को भी चमत्कृत कर दे। ये बात प्रसिद्ध कवि, कथाकार, चिंतक और आर्ट-क्रिटिक उदयन वाजपेयी ने कही। वे कहानीपुर, मुम्बई के सहयोग से सर्जना एकेडमी फ़ॉर डिज़ाइन एंड फाइन आर्ट द्वारा कहानी कहने की कला पर आयोजित तीन-दिवसीय वर्कशॉप स्टोरी टेलिंग मुज़िंग्स के समापन पर प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डिज़ाइन एक तरह का रेजोल्यूशन है जो किसी अमुक टास्क के लिए किया जाता है, जबकि कला ओपन एंडेड होती है और उसके अलग-अलग मायने नए-नए अर्थ देते रहते हैं। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि हिंदी से प्रेम करें और हिंदी के शब्द, शहर के नाम आदि जानने-समझने की कोशिश करते रहें।
इस अवसर पर प्रोफेशनल स्टोरी टेलर संवेदना अमिताभ ने बताया कि ये वर्कशॉप विशेष रूप से सर्जना एकेडमी के भविष्य के कलाकार-डिज़ाइनर बच्चों के लिए डिज़ाइन की गई, जिसमे तीन-चार जॉनर की कहानी एक्सप्रेशन और साउंड इफेक्ट्स के साथ नरेट की गई। बच्चों के ग्रुप्स बनाकर उन्हें अपने जीवन से जुड़ी या मम्मी-पापा, दादी-नानी से सुनी कहानी को चित्र के साथ प्रस्तुत करने को कहा। बच्चों ने दो कहानियाें को चित्र और साउंड इफेक्ट्स के साथ बहुत ही आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया।
इस कार्यशाला में 17 से 19 वर्ष के 24 बच्चों ने भाग लिया। अंत मे मुख अतिथि उदयन वाजपेयी ने सभी प्रतिभागी बच्चों को सर्टिफिकेट प्रदान किए।
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