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बीयू में प्रिंटिंग मशीन और बाहर से छपाई को लेकर खींचतान

3 वर्ष पहले
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डीबी स्टार भोपाल

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय प्रति वर्ष अनेक विषयों की परीक्षाएं आयोजित कराता है। इसके लिए बड़ी संख्या में प्रश्न-पत्र, उत्तर पुस्तिकाएं, डिग्रियां, अंक सूची और अन्य सामग्री की जरूरत पड़ती है। बीयू के पास खुद की प्रिंटिंंग मशीन और स्टाफ है। इसके बाद भी अधिकांश छपाई बाहर से कराई जाती है। जिस पर सालाना लगभग 2 करोड़ रुपए खर्च होते हैं, जबकि मुद्रणालय के अफसरों ने बीयू प्रशासन को अत्याधुनिक ऑफसेट मशीन खरीदने का प्रस्ताव कई बार भेजा। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

विवि की मुद्रणालय शाखा में प्रिंटिंग मशीनें 35-40 साल पुरानी हैं। इनकी छपाई स्पष्ट पढ़ने में नहीं आती। ऑटोमेटिक सिलेंडर मशीन भी बंद पड़ी है। ये सभी प्रिंटिंग मशीनें खराब हो चुकी हैं। बताया जाता है कि लगभग 10 वर्षों से प्रिंटिंग का काम बंद है। करीब 13 लोगों के स्टाफ के पास नाम मात्र का काम है। यहां छपाई के नाम पर सिर्फ अवार्ड शीट ही छपती है। मुद्रणालय शाखा के कर्मचारियों ने डीबी स्टार को बताया कि वे पिछले 15 वर्षोँ से अत्याधुनिक ऑफसेट मशीनें खरीदने की मांग कर रहे हैं। इसके लिये कई बार प्रस्ताव भी बनाकर भेजा गया। लेकिन मशीनें खरीदने के बजाय बीयू के अफसर करोड़ों रुपए खर्च कर प्राइवेट प्रिंटर्स से छपाई करवाते हैं। उन्होंने इस काम में भारी भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है।

एक तरफ कर्मचारियों का कहना है कि बीयू के अफसर जानबूझकर ऑफसेट मशीनें नहीं खरीद रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है की बाहर से छपाई करवाने से बीयू की गोपनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर मशीनें आ जाएं तो प्रिंटिंग का सारा काम बीयू में ही होगा। साथ ही दो करोड़ रुपए भी बचेंगे। दूसरी ओर मुद्रणालय शाखा का कहना है कि वह मशीनों के तीन बार प्रस्ताव बनाकर भेज चुका है। लेकिन बीयू प्रबंधन ने हर बार वापिस कर दिया। पूछने पर बताया कि अच्छी क्वालिटी की मशीनें लगभग 20 लाख रुपए तक आएंगी। इससे छपाई भी बेहतर होगी।

इनका कहना है

 हम बाहर की कंपनियों से कितने प्रश्न-पत्र, उत्तर-पुस्तिकाएं एवं अन्य सामग्री की प्रिंटिंग करवाते हैं और कितनी राशि खर्च की जाती है, इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं दे सकते। राकेश वर्मा, अनुभाग अधिकारी, बीयू, भोपाल

 बीयू के कुछ अधिकारी नहीं चाहते की मशीनें खरीदी जाएं। कर्मचारियों के पास काम नहीं है। कमीशन के चक्कर में करोड़ों रुपए की छपाई बाहर से करवा रहे हैं। अगर मशीनें खरीद लें तो करोड़ों रुपए की बचत होगी और कार्य भी समय पर पूर्ण होंगेे। सुधीर ठाकरे, अध्यक्ष, गैर शिक्षक कर्मचारी संघ, बीयू

 मशीनें खरीदने 7 लाख रुपए का प्रस्ताव बीयू प्रबंधन को तीन बार भेजा था। उसका कहना है कि अच्छी क्वालिटी की मशीनें खरीदी जाएं। इस पर लगभग 20 लाख रुपए खर्च होंगे। कंपनियों से रेट बुलवाए हैं। फिर से प्रस्ताव भेजेंगे। कर्मचारियों को भी इसकी ट्रेंनिग देना पड़ेगी। शिव नारायण शर्मा, इंचार्ज, मुद्रणालय शाखा, बीयू

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