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भोपाल के क्लैट एस्पिरेंट्स भी कर रहे दोबारा परीक्षा की मांग

3 वर्ष पहले
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13 मई को हुई परीक्षा में 20 से 25 मिनट तक रहा था व्यवधान, अभ्यर्थियों के कई सवाल छूटे

सिटी रिपोर्टर | भोपाल

देशभर की 19 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए 13 मई को हुए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट)-2018 की एक आेर जहां आंसर-की जारी कर दी गई है, वहीं इस बार एग्जाम सेंटर्स पर हुई प्रॉब्लम को लेकर विरोध करते हुए देशभर के स्टूडेंट्स इसे दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं। हालात यह हैं कि एक सप्ताह में ही दिल्ली हाईकोर्ट, जबलपुर हाईकोर्ट, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और जयपुर हाईकोर्ट में छात्रों ने पिटीशन दायर कर दी हैं।

टाइम काउंटिंग में प्रॉब्लम

जबलपुर हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करने वाले सलिल खरे ने बताया, इस परीक्षा में मेरी बेटी बैठी थी। शुरुआती दस मिनट तक कंप्यूटर चालू नहीं हुआ और टाइम काउंटिंग शुरू हो गई। उसे रीस्टार्ट किया, तो दोबारा टाइम काउंट 10 मिनट के आगे से शुरू हुआ। कुछ सेंटर्स पर एग्जाम रात 7.30-8.00 बजे तक हुआ। किसी को पूरे दो घंटे का समय ही नहीं मिला तो किसी को 2-2 घंटे का एक्स्ट्रा टाइम मिला। कुछ लोगों के लिए स्पेशल अरेंजमेंट रखने की भी जानकारी मिली। मप्र से करीब 50 स्टूडेंट्स और सामने आए हैं, जिन्हें प्रॉब्लम हुई है।

हाईकोर्ट में री-ड्राफ्ट प्रोसेस आज

क्लैट एक्सपर्ट हर्ष गंगरानी ने बताया, जयपुर हाईकोर्ट ने क्लैट कराने वाले केरल कोच्ची के नेशनल लॉ ऑफ एडवांस लीगल स्टडीज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में नाम जोड़ने के लिए री-ड्राफ्ट प्रोसेस 21 मई को की जानी है। देश में करीब 1800 स्टूडेंट्स अभी तक सामने आए हैं, जो क्लैट का विरोध कर रहे हैं।

10 बार बंद हुआ कंप्यूटर

क्लैट प्रतिभागी धर्मेश ने बताया, 2.30 बजे से एग्जाम के इंस्ट्रक्शंस का डेमो देना था, जो कि मेरे सिस्टम पर तीन बजे शुरू हुआ। 20 मिनट मेरे यूं ही वेस्ट हो गए। सिटिंग स्पेस भी कम था। किसी को कहीं भी बैठा दिया गया था। वहीं स्टूडेंट ऋतिक तेंगुरिआ ने कहा, 10 बार मेरा कंप्यूटर शटडाउन हुआ। पेपर शुरू हुआ तो मेरे सिस्टम पर सब कुछ कोडेडे लैंग्वेज में था और टाइम काउंट बढ़ने लगा। री-स्टार्ट किया, तो टाइम काउंट री-स्टार्ट नहीं हुआ, बल्कि जितना आगे बढ़ चुका था, उसके आगे से समय शुरू हुआ। दो से तीन बार सिस्टम हैंग भी हुआ।

क्लैट इम्प्लीमेंटेशन में हुईं परेशानियों के कारण स्टूडेंट्स कर रहे विरोध

वे समस्याएं, जो प्रभावित कर सकती हैं परिणाम

पेपर शुरू होने पर सवाल कोड लैंग्वेज में नजर आए, जिससे शुरुआती 10 से 15 मिनट तक स्टूडेंट्स सवाल पढ़ ही नहीं सके।

सवाल हल करने के बाद नेक्स्ट का बटन दबाने पर 4-4 सवालों का जम्प हो रहा था, बीच के सवाल नजर ही नहीं आए।

पेपर सॉल्व करते समय 10-10 मिनट के लिए स्टूडेंट्स के कंप्यूटर हैंग हुए।

एग्जाम सेंटर्स पर जो पेन दिए गए थे, वे काम नहीं कर रहे थे।

एग्जाम के दौरान चलते-चलते स्क्रीन कई बार ऑफ हुई।

एग्जाम सेंटर पर रफ पेपर की शॉर्टेज थी, किसी को ज्यादा पेपर्स दिए गए, किसी को कम।

जबलपुर हाईकोर्ट में दायर की पिटीशन

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