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अवैध निर्माण ने अटकाया ई-8 की रेलवे गृह निर्माण सोसायटी का लीज नवीनीकरण

3 वर्ष पहले
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राजधानी के अरेरा कॉलोनी ई-8 में बनी रेलवे गृह निर्माण सोसायटी की जमीन की लीज तीन साल पहले खत्म हो चुकी है। यहां पर 150 से ज्यादा परिवार रहते हैं। इस सोसायटी में खुद सांसद आलोक संजर भी रहते हैं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी न तो लीज रिन्यू हो रही और न ही इस पर कोई फैसला हो पा रहा है। इससे न तो मकान बनाने के लिए बिल्डिंग परमिशन मिल रही है और न ही बैंक लोन और नजूल एनओसी मिल पा रही है। सोसायटी में घर की जगह पर कमर्शियल कांप्लेक्स तान दिए गए। सभी पॉश इलाके। कीमतें करोड़ों रुपए में हैं फिर भी ये अवैध हैं। वजह है लीज शर्तों का उल्लंघन। जब कलेक्टोरेट के अफसरों ने लीज शर्त के उल्लंघन को लेकर पेनाल्टी लगाने की प्रक्रिया शुरू की तो पता चला कि यह जमीन सोसायटी को दी गई थी। करीब साढ़े 11 एकड़ जमीन पर 150 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं। इसमें से 26 ऐसे लोग सामने आए हैं। जो सोसायटी की जमीन का कमर्शियल उपयोग कर रहे हैं। इसे लीज शर्तों का उल्लंघन माना गया। कलेक्टोरेट के अफसर असमंजस में पड़ गए कि पेनाल्टी किस पर लगाई जाए। ये जमीन सोसायटी को दी गई थी। जबकि लीज शर्तों का उल्लंघन सदस्यों द्वारा किया गया है। इसे लेकर बैठकों का दौर चला। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

अफसरों की गलती का खामियाजा भुगतने को मजबूर कॉलोनी के आम रहवासी

शासन स्तर पर तय हुआ था कि नए संशोधन के वक्त इसमें बदलाव किया जाएगा। लेकिन पिछले दिनों लीज रेंट की कार्रवाई में अफसर इसे शामिल करना ही भूल गए। नतीजा मामला अभी तक जस का तस बना हुआ है। रेलवे गृह निर्माण सोसायटी के अलावा मन्नी पुरम, अराधना नगर सहित अन्य ऐसी सोसायटियां हैं। जिनको सरकार ने 30 साल के लिए जमीन लीज पर दी थी। अब इन सोसायटियों की लीज की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। करीब ढ़ाई हजार ऐसे लोग हैं जो लीज रेंट जमा करने को तैयार हैं। लेकिन लीज रिन्यू नहीं हो पा रही है। सोसायटियों के अध्यक्ष और सदस्य सरकारी ऑफिसों के चक्कर काट काटकर थक चुके हैं।

पोर्च में निकाल दीं दुकानें

राजधानी के अरेरा कॉलोनी में 1970 के दशक में कुल 16 हजार 43 प्लॉट्स लीज पर दिए गए थे। कई मकान हैं, जिनकी लीज 1995 में ही समाप्त हो गई है। घर बनाने की जगह सैकड़ों लोगों ने कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना दिए हैं। कुछ ने घर के आगे के पोर्च में दुकानें निकाल दी हैं। ऐसे करीब 133 रहवासियों के पट्टे तलाशे गए हैं। अब इन लोगों से लीज की पुरानी दर का 6 गुना और मौजूदा कलेक्टर गाइडलाइन की कीमत का 5 फीसदी जुर्माना लगाया जाएगा।

कलेक्टर से लेकर पीएस तक से मिल चुके हैं

कुछ लोगों द्वारा यहां पर आवासीय की जगह पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तान दिए गए। शर्त उल्लंघन के चलते लीज रिन्यू नहीं हो पा रही है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव, कलेक्टर, एडीएम और एसडीएम के दफ्तरों के तीन साल में 300 बार चक्कर लगा चुका हूं। केएल पुरोहित, अध्यक्ष रेलवे हाउसिंग सोसा.

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