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मोंटी ने मैक्स विलियम बनकर महिला बैंक अफसर से ठगे थे Rs. 16.50 लाख

3 वर्ष पहले
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जीवनसाथी डॉटकॉम के माध्यम से एक महिला बैंक अधिकारी से संपर्क कर उन्हें 16.50 लाख रुपए की चपत लगाने वाले गिरोह के मास्टर माइंड की सायबर क्राइम पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है। इस गिरोह के पांच आरोपियों को सायबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। युवतियों को प्रभावित करने के लिए आरोपी हाई प्रोफाइल लाइफ स्टाइल और महंगी लग्जरी कार की फोटो फर्जी फेसबुक वॉल पर अपलोड करता था। आरोपी की तलाश में सायबर क्राइम पुलिस की टीम दिल्ली समेत अन्य शहरों में दबिश दे चुकी है।

जानकारी के मुताबिक जबलपुर निवासी बैंक अधिकारी की जीवनसाथी डॉट कॉम पर प्रोफाइल थी, जिसे देखने के बाद मैक्स विलियम नामक एक व्यक्ति ने 15 मार्च को उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। उसे उन्होंने एक्सेप्ट कर लिया था। मैक्स ने खुद को लंदन का रहने वाला बताया था। 15 दिन की दोस्ती के बाद मैक्स ने 3 अप्रैल को महिला बैंक अधिकारी को बताया कि वह उससे मिलने भारत आया है। उसके लिए मंहगे गिफ्ट लाया है। लेकिन अधिक नकद राशि होने के कारण कस्टम में फंस गया है। उसने भरोसा दिलाया था कि वह केवल भारत उससे ही मिलने आया है। कस्टम ड्यूटी भरने के लिए उसे 16.50 लाख रुपए की आवश्यकता है। मैक्स विलियम नामक व्यक्ति के झांसे में आकर उन्होंने पांच खातों में चार-पांच दिन में 16.50 लाख रुपए जमा करा दिए।

सायबर क्राइम पुलिस इस जालसाज गिरोह के पांच सदस्यों हरेंद्र सिंह, सिद्धार्थ शर्मा, शिवम गुप्ता, बद्रीश मिश्रा उर्फ बद्री उर्फ सतीश चौरसिया और नाइजीरिया के अबिया स्टेट निवासी जॉन अंबरी को गिरफ्तार कर चुकी है। सायबर क्राइम पुलिस की विवेचना में सामने आया कि इस गिरोह के मास्टर माइंड दिल्ली निवासी मोंटी सिंह ने खुद को लंदन निवासी मैक्स विलियम बताते हुए बैंक अधिकारी से दोस्ती की थी। मोंटी हिंदी और अंग्रेजी के अलावा जापानी, चीनी और फ्रेंच भी बोलता है।

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नाइजीरियाई लगाता है रकम को ठिकाने

जांच एजेंसी की पड़ताल में सामने आया है कि मोंटी सिंह के गिरोह में 10 सदस्य हैं। कानपुर (उप्र) और झारखंड के लोग मोंटी सिंह के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इन खातों की व्यवस्था हरेंद्र सिंह, सिद्धार्थ शर्मा और शिवम गुप्ता आदि करते थे। ठगी की रकम खातों में जमा होते ही उसे तुरंत निकाल लिया जाता था। बद्रीश उर्फ बद्री यह रकम नाइजीरियाई जॉन अंबरी को देकर कमीशन हासिल करता था। नाइजीरियन इस रकम को कैसे ठिकाने लगाते हैं इसकी जांच सायबर क्राइम पुलिस कर रही है। शातिर जालसाज होने के कारण इनसे कुछ भी उगलवा पाना पुलिस के लिए मुश्किल होता है।

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