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संपत्तिकर, जलकर जमा करने दूसरे वार्ड में जाते हैं लोग, क्योंकि वहां दफ्तर ही नहीं

3 वर्ष पहले
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भोपाल में नगर निमग के दो वार्ड ऐसे हैं, जिनका कार्यालय दूसरे वार्डों से संचालित होता है। यानी वार्ड-57 और 60 के रहवासियों को संपत्तिकर, जलकर के साथ ही अपने शिकवे-शिकायत के लिए वार्ड 56 में बने वार्ड कार्यालय में जाना होता है। वहीं वार्ड 61 का कार्यालय अवधपुरी में 7 हजार रुपए प्रतिमाह पर एक निजी मकान में संचालित हो रहा है। ऐसा इसलिए कि तीन साल पहले इन वार्डों में कार्यालय बना के लिए टेंडर तो हो गए, लेकिन आज तक न तो राशि मिली और न ही वर्क ऑर्डर हुए। तीनों ही वार्ड कार्यालय 10-10 लाख रुपए की लागत से बनने हैं। वार्ड 60 के पार्षद पति भेल कर्मचारी हैं। इसलिए उन्होंने भेल का क्वार्टर किराए से लेकर वार्ड कार्यालय खुलवा दिया, जो करीब 3 किमी दूर है। कार्यालय भेल के बरखेड़ा क्षेत्र में भेल के क्वाटर में है। इसका किराया 3 हजार 750 रुपए बिजली व पानी सहित भेल ले रहा है।

तीन साल पहले 10-10 लाख में बनना थे कार्यालय, आज तक मुख्यालय से फाइल ही नहीं लौटी

टेंडर तो हो गए, लेकिन न पैसा मिला और न ही वर्क ऑर्डर जारी हुए

किराए के वार्ड कार्यालय... वार्ड-61 का वार्ड कार्यालय निजी मकान में 7 हजार रुपए प्रति माह और वार्ड-60 का कार्यालय भेल के क्वार्टर में 3750 रुपए महीने पर संचालित हो रहा है, जबकि वार्ड-57 की पार्षद वार्ड-56 के कार्यालय में बैठ रही हैं। इधर, नगर निगम के नगर यंत्री सिविल पीके जैन का कहना है कि किसी भी वार्ड के काम नहीं रोके गए हैं। वार्ड कार्यालय के लिए भेल से भूमि मांगी है। वार्ड-54 में भी वार्ड कार्यालय बनना है, वहां भवन का स्ट्रक्चर बन चुका है।

नगर निगम द्वारा इस क्षेत्र में जो भी काम दो या ढाई साल पहले शुरू होना थे, वे रुक गए हैं। इस बारे में नगर निगम के अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। -उषा चुरेंद्र, पार्षद, वार्ड-60

वार्ड कार्यालय के लिए टेंडर होने के बाद भी निगम मुख्यालय से फाइल ही नहीं लौटी। फाइल कहां गई इस संबंध में किसी के पास कोई जवाब नहीं है। -गणेश राम नागर, पार्षद, वार्ड-61

वार्ड कार्यालय नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। बैठने की भी जगह नहीं थी, इसलिए वार्ड-56 के कार्यालय में ही टेबल-कुर्सी रख ली है। -रश्मि द्विवेदी, पार्षद, वार्ड-57

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