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आईटीएमएस : पूरी गाड़ी ही स्कैन कर लेंगे कैमरे, नंबर प्लेट बदलने पर भी पकड़ लेगा सिस्टम, बज उठेगा सायरन

3 वर्ष पहले
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अपराध करने के बाद आरोपियों को अब वाहन छिपाना मुमकिन नहीं होगा। अपराध में लिप्त ऐसे वाहनों का पता लगाने के बाद पुलिस उनका डेटा इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) में फीड कर देगा। इसमें चोरी गए वाहन, बिना नंबर और किसी भी अापराधिक गतिविधियों में लिप्त जैसे लूट, डकैती, हत्या और चोरी जैसी वारदात में उपयोग किए वाहन होंगे।

जानकारी मिलते ही आईटीएमएस ऐसे वाहनों को राडार पर लेगा। उसके बाद शहर के मार्गों पर गुजरने वाले ऐसे वाहन आईटीएमएस के सेंसर के सामने आते ही पकड़े जाएंगे। इससे कैमरों के साथ लगे सायरन बजने लगेंगे। उनका शहर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा और पुलिस को उन तक पहुंचने में आसानी होगी। जल्द ही पूरा सिस्टम काम करने लगेगा। ट्रायल के बाद जरूरतों के मुताबिक पूरा सिस्टम अपडेट किया जा रहा है।

तैयारी ऐसी : फिंगरप्रिंट के मिलान की तरह काम करेगा सिस्टम

पुलिस का बचेगा समय

अभी पुलिस सीसीटीवी फुटेज लेकर घंटों उनको जूम इन और जूम आउट करती रहती है। कैमरों की क्वालिटी अच्छी नहीं होने से आरोपियों के चेहरे और गाड़ी के नंबर साफ नहीं होते। इन फुटेज को कई लोगों को दिखाने के बाद भी पुलिस को समस्या का समाधान नहीं मिल पाता। आईटीएमएस के कारण पुलिस का इस तरह की जांच में समय बच जाएगा।

शहर में 24 लोकेशन पर लगे हैं कैमरे

अगर वाहन सेंसर के सामने से नहीं निकलता है तो?

आईटीएमएस के तहत शहर की 24 लोकेशन पर कैमरे लगाए गए हैं। यह शहर के लगभग सभी प्रमुख रास्तों और चौराहों को कवर करते हैं। ऐसे में यह संभव ही नहीं कि वाहन किसी न किसी कैमरे की जद में न आए।

एक ही कलर की कई वाहन होने पर कैसे काम करेगा?

सेंसर सिर्फ उसी वाहन को ट्रेस करेगा, जिसकी जानकारी फीड की गई है। यह वाहन को फिंगर प्रिंट की तरह स्कैन कर उसका पता लगा लेगा।

मान लीजिए यदि एक कार एक्सीडेंट करके फरार हो जाती है। ऐसे में पुलिस उसका नंबर आईटीएमएस में फीड कर देगी। यह बिल्कुल फिंगर प्रिंट के मिलान की तरह ही काम करेगा। अब अगर आरोपी गाड़ी का नंबर भी बदल लेता है, तो वाहन का कलर, मार्क और अन्य फीचर को स्कैन कर उसका पता लगा लिया जाएगा, जिससे उसे पकड़ना आसान होगा।

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