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चार्जशीट तैयार, दो महीने से व्यापमं कोर्ट में मजिस्ट्रेट ही नहीं

3 वर्ष पहले
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व्यापमं महाघोटाले की जांच कर रही सीबीआई की जांच अधर में फंस गई है। दो महीने से व्यापमं के मामलों के लिए मजिस्ट्रेट ही नहीं है। दो महीने पहले मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह सीजेएम के रुप में पदोन्नत हो चुके हैं, उसके बाद से अब तक व्यापमं के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं हो पाया है। थक हारकर सीबीआई ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द व्यापमं केस के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएं। उधर, मजिस्ट्रेट की गैरमौजूदगी में सीबीआई द्वारा तैयार की गई घोटालों की 6 चार्जशीट अधर में अटकी हुई है।

सीबीआई के भोपाल में तीन कोर्ट हैं। जिन मामलों मे चार्जशीट हो गई है, उनमें यहां सुनवाई तो चल रही है लेकिन मजिस्ट्रेट न होने से नए केस में चार्जशीट पेश नहीं हो पा रही है। सीबीआई पहले ही जांच अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। इस पर न्यायालयीन प्रक्रिया में हो रही देरी से मुश्किल और बढ़ गई है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मोहम्मद फईम अनवर ने भी स्वीकार किया है कि दो माह पहले हुए मजिस्ट्रेट के तबादलों के बाद से व्यापमं के केस के लिए मजिस्ट्रेट नहीं है। अनवर ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर मजिस्ट्रेट नोटिफाई कर दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि 15 जुलाई 2015 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद व्यापमं घोटालों की जांच सीबीआई को मिली थी।

सीबीआई ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार.. व्यापमं मामलों के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त करें, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे, सीबीआई के पास 40 से ज्यादा मामलों की जांच पेंडिंग

ट्रायल से पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश होती है चार्जशीट, इसलिए जरूरी है मजिस्ट्रेट

व्यापमं मामलों के लिए विशेष न्यायालय नोटिफाई किए गए हैं। भोपाल में सीबीआई की तीन स्पेशल कोर्ट में सीजेएम पदस्थ हैं। ग्वालियर में दो, इंदौर और जबलपुर में एक-एक कोर्ट हैं। इन कोर्ट में केस का ट्रायल होता है। लेकिन इससे पहले केस की चार्जशीट मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश होती है। दो महीने से भोपाल और ग्वालियर में मजिस्ट्रेट न होने से सीबीआई इसके लिए लगातार अलग-अलग न्यायिक अधिकारियों से गुहार लगा रही है।

सितंबर 2017 की डेडलाइन दी थी सुप्रीम कोर्ट ने..

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सितंबर 2017 तक सभी केस की जांच पूरी कर चार्जशीट पेश करने के निर्देश दिए थे लेकिन डेडलाइन पर जांच पूरी नहीं हो सकी। वर्तमान में सीबीआई के पास 40 से ज्यादा मामलों की जांच पेंडिंग हैं। 6 केस में जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट तैयार हो चुकी है लेकिन इसे पेश नहीं किया जा सका है। इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई है। अर्जी में कहा गया है कि व्यापमं मामलों के लिए जल्द ही मजिस्ट्रेट नोटिफाई किए जाएं।

जांच अधिकारियों से पूछा.. कहां जाना चाहते हैं

व्यापमं मामलों की जांच अब अंतिम चरण में है। सीबीआई मुख्यालय व्यापमं जोन में पदस्थ 60 से ज्यादा जांच अधिकारियों को वापस भेज चुका है। बचे हुए अफसरों से भी उनकी इच्छा पूछी गई है कि वे कहां जाना चाहते हैं। सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि सितंबर 2018 तक बचे हुए सभी मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट पेश कर दी जाएगी। यही वजह है कि अब यहां पदस्थ जांच अधिकारियों के तबादले की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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