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बदइंतजामी... पीक ऑवर्स में चल समारोह की अनुमति, लेकिन कोई ट्रैफिक प्लान नहीं

3 वर्ष पहले
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पुलिस ट्रैफिक जाम छोड़ वीआईपी मूवमेंट की चिंता में लगी रही

भोपाल | भगवान परशुराम की शोभायात्रा, रेलवे का कार्यक्रम और वीआईपी मूवमेंट के कारण सोमवार शाम चेतक ब्रिज से लेकर शिवाजी नगर तक 4 घंटे तक हजारों लोग ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। चेतक ब्रिज के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में लोगों को एक घंटे से भी ज्यादा समय लगा। वाहन चालकों ने गौतम नगर के रास्ते रचना नगर अंडरब्रिज से निकलने की कोशिश की, लेकिन वे भी जाम में फंस गए। स्थिति यह थी कि प्रेस कॉम्प्लेक्स से लेकर मैदामिल तक हजारों वाहनों की कतार लग गई। इस पूरी बदइंतजामी के पीछे कारण पुलिस का ट्रैफिक मैनेजमेंट फेल होना रहा।

शाम 7:30 बजे बोर्ड ऑफिस चौराहा पर ट्रैफिक की कुछ ऐसी हालत थी।

पुलिस की यह कैसी ट्रैफिक व्यवस्था

जाम की चिंता नहीं.. वीआईपी मूवमेंट के लिए कई जगहों पर ट्रैफिक रोका

पुलिस ट्रैफिक जाम को खत्म कराने का कम छोड़कर सीएम हाउस से शिवाजी नगर स्थित परशुराम मंदिर तक मुख्यमंत्री के काफिले का ट्रैफिक प्लान बनाने में व्यस्त रही। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने वीआईपी मूवमेंट के नाम पर नानके पेट्रोल पंप तिराहा, शिवाजी नगर तिराहा और बोर्ड ऑफिस चौराहे पर ट्रैफिक को कुछ समय के लिए रोका भी था।

चार घंटे रेंगते रहे वाहन हजारों लोग फंसे

गलत टाइमिंग... दफ्तरों की छुट्टी के समय का ध्यान नहीं रखा

पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन का कोई प्लान नहीं बनाया था। शोभायात्रा आयोजन समिति को यातायात बाधित नहीं होने की शर्त पर चल समारोह की अनुमति दे दी। इसके अलावा पुलिस ने कार्यक्रम की अनुमति देते समय सोमवार को वर्किंग डे और शाम 5 बजे सरकारी दफ्तरों की छुट्टी के समय को भी ध्यान में नहीं रखा।

रैली, शोभायात्रा निकालना लोगों का अधिकार है, लेकिन इससे होने वाली अव्यवस्था से दूसरों के अधिकारों का हनन न हो इस बात की जिम्मेदारी आयोजक और प्रशासन दोनों की है। जब भी ऐसे जरूरी धार्मिक-सामाजिक आयोजन हों तो समय ऐसा चुनना चाहिए, जब ट्रैफिक का दबाव कम हो। इसी तरह आए दिन होने वाले धरना-प्रदर्शन भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। प्रशासन ऐसे आयोजनों के लिए शहर में कोई एक स्थान निर्धारित क्यों नहीं करता? मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कुछ अन्य महानगरों में इसी तरह की व्यवस्था है। ऐसी पहल हुई तो शहर बार-बार होने वाली ऐसी परेशानियों से बच जाएगा।

तीन कार्यक्रम एक साथ होने के कारण दिक्कत हुई

पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में नाकाम रही?

- वीआईपी मूवमेंट, रेलवे का कार्यक्रम और चल समारोह एक साथ होने के कारण कुछ समस्या हुई, लेकिन ट्रैफिक डायवर्ट करके चलाया गया।

पीक आॅवर्स में अनुमति क्यों दी गई?

-पीक अाॅवर्स में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। आगे किसी भी कार्यक्रम को अनुमति देने से पहले इसका ध्यान रखा जाएगा।

धर्मेंद्र चौधरी, डीआईजी

इधर...आरक्षण का विरोध

मुख्यमंत्री के सामने नारेबाजी- पदोन्नति में आरक्षण खत्म करो

युवा लहराते रहे तख्तियां, हंगामा बढ़ता देख शिवराज को पीछे के रास्ते से निकाला

शिवाजी नगर स्थित परशुराम मंदिर के सामने आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाषण के बाद ब्राह्मण समाज के युवकों ने आरक्षण खत्म करने को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। वे हाथ में तख्ती लिए पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे थे। उनकी मांग थी कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार पर दिया जाए। सीएम को बीच में भाषण रोकना पड़ा। हंगामा बढ़ता देख आयोजकों ने मुख्यमंत्री को पीछे के रास्ते से बाहर निकाला। लेकिन नारेबाजी कर रहे लोग शांत नहीं हुए। कार्यक्रम में मौजूद ज्यादातर लोग इन युवाओं का समर्थन करते देखे गए। खनिज निगम के अध्यक्ष शिव चौबे और राष्ट्रीय एकता परिषद के रमेश शर्मा युवाओं को समझाइश देने की कोशिश करते रहे, लेकिन लोगों ने उनका भी विरोध कर दिया। मामले की नजाकत को देखते हुए वे शांत हो गए। यह सारा घटनाक्रम करीब 10 मिनट चला। -पढ़ें पेज 6

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