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कोझिकोड में चमगादड़ से फैला ‘निपाह’ वायरस, 11 की मौत

3 वर्ष पहले
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केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस (एनआईवी) से संक्रमित होकर 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इस जानलेवा वायरस से पीड़ित छह लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि 25 प्रभावित सघन निगरानी में रखे गए हैं। जानवरों से फैलने वाला यह वायरस कोझिकोड में चमगादड़ के जरिये फैला है। फ्रूट बैट कहा जाने वाला चमगादड़ मुख्यत: फल या फल के रस का सेवन करता है।

निपाह से मौतों की सूचना के बाद पूरा केरल हाई अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पी विजयन ने निर्देश दिया है कि कोई भी निजी अस्पताल निपाह वायरस से संक्रमित मरीज के इलाज से इनकार नहीं करेगा। वायरस को आगे फैलने से रोकने और विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य के स्वास्थ्य और श्रम मंत्री ने कोझिकोड में डेरा डाल रखा है। दो कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं। शेष | पेज 11 पर



केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के डायरेक्टर के नेतृत्व में डॉक्टरों की हाई लेवल टीम भी केरल भेजी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केरल के स्वास्थ्य विभाग से लगातार संपर्क बनाए हुए है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने ब्लड सैंपल की जांच के बाद पुष्टि की है कि बुखार के कारण हुई चार में से तीन मौतों की वजह निपाह वायरस था। पहली मौत 19 मई को हुई थी।

मलेशिया के निपाह प्रांत में मिला था यह वायरस

संक्रमण से फैलता है

फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर इसके वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है। निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढ़ाता है।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, उनके कुएं में मिला था फ्रूट बैट, इलाज करने वाली नर्स की भी जान गई

निपाह वायरस के कारण कोझिकोड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वायरस की चपेट में आए परिवार के मुखिया का भी इलाज चल रहा है। उनके घर के कुएं में फ्रूट बैट मिला है।

स्वास्थ्य मंत्री केके शिलाजा ने कहा कि अब कुआं बंद कर दिया गया है। इन लाेगों का उपचार करने वाली लिनी नाम की नर्स की भी तेज बुखार के बाद मौत हो गई। इस बीमारी की वजह से अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है।

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बांग्लादेश में संक्रमित खजूर खाने से फैल चुकी है ये बीमारी

एनआईवी वायरस की पहचान सबसे पहले मलेशिया के कामपुंग सुंगाई निपाह में हुई थी। तब वहां सूअरों से फैला था।

2001 में प. बंगाल के सिलिगुड़ी में भी इस वायरस का संक्रमण फैला था। तब 66 केसों में से 45 की माैत हुई थी।

2004 में फ्रूट बैट द्वारा संक्रमित किए गए खजूर खाने से बांग्लादेश में भी लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए थे।

2007 में नदिया में भी निपाह के संक्रमण से 5 लोगों की मौत हो चुकी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।

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