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250 से ज्यादा पेड़ों पर करीब 50 हजार चमगादड़ों का डेरा, आसपास जाने से बचें

3 वर्ष पहले
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आपके आसपास फलदार पेड़ लगे हैं और उन पर अगर चमगादड़ आते हैं तो सावधान होने की जरूरत है। ऐसे पेड़ों के फलों को भी न खाएं, ऐसा इसलिए क्योंकि चमगादड़ों में पाए जाने वाले ‘निपाह’ नाम के जानलेवा वायरस के संपर्क में आने से केरल में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में हमें भी इसे लेकर अलर्ट हो जाना चाहिए, ताकि समय रहते हम इस संक्रमण से बच सकें।

केबल स्टे ब्रिज के पास कमला पार्क सहित आसपास के इलाकों में लगे 250 से ज्यादा पेड़ों पर इन दिनों 50 हजार से अधिक चमगादड़ मौजूद हैं। कमला पार्क के अंदर लगे पेड़ों और मेन रोड के पेड़ों पर इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। यहां पार्क में हर दिन ढाई हजार लोग की आवाजाही होती है। ऐसे में केरल में निपाह वायरस के कारण हुई मौत के बाद से यहां आने वालों को भी सावधानी रखनी चाहिए। जानकारी के मुताबिक तालाब के आसपास हर साल चमगादड़ होली के बाद से आने लगते हैं। और बारिश शुरू होते ही पहाड़ी इलाकों में जा छिपते हैं।

क्या होता है निपाह वायरस... डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है। 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। भारत में इससे पहले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नादिया में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है

इस वायरस के कारण 75% मामलों में मौत हो जाती है, इसलिए ध्यान रखें यदि आपके घर के आसपास के पेड़ों पर चमगादड़ आते हैं तो उस पेड़ से गिरे फल न खाएं

कमला पार्क केे आसपास के इलाके में सबसे ज्यादा चमगादड़

चमगादड़

ऐसे फैल सकता है निपाह

चमगादड़ पेड़ो के फल खाता है।

सुअर के संपर्क में अाने से ये निपाह मनुष्यों में आता है

तेज बुखार और दिमाग में भी होती है जलन

लक्षण... सांस लेने में होती है दिक्कत

इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है। दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है।

भोपाल में अभी अलर्ट जारी नहीं

इस तरह के मामलों में केन्द्र की ओर से निर्देश मिलने पर ही अलर्ट जारी किया जाता है। इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत अभी ऐसे निर्देश नहीं मिले हैं। - गौरी सिंह, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग

इस पेड़ से गिरा फल यदि सुअर खाता है ।

खतरनाक... कोई वैक्सीन तक नहीं

इसकी इंसान या जानवरों के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। इससे प्रभावित शख्स को आईसीयू में रखकर इलाज करना होता है।

चमगादड़ का झूठा फल खाने पर मनुष्य में आ सकता है संक्रमण

निपाह संक्रमित चमगादड़ यदि घोड़ों के संपर्क में आए।

संक्रमित घोड़े के संपर्क से वायरस इंसानों में आता है

सावधानी.. ऐसे पेड़ों के फल न खाएं

बीमारी से बचने के लिए उस पेड़ के फल न खाएं जिन पर चमगादड़ बैठती हों। बीमार सुअर, घोड़ों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

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