मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को मॉडल स्कूल में कॅरियर काउंसलर बनकर बच्चों के सवालों के जवाब दिए। ‘हम छू लेंगे आसमां’ कार्यक्रम में उन्होंने बच्चों को बेहतर कॅरियर का चुनाव करने के फंडे बताए। इसी दौरान छात्र मोहित सोनी ने जब उनसे पूछा कि आपने कॅरियर का चुनाव कैसे किया? तो सीएम ने कहा कि जीव विज्ञान की पढ़ाई में मुझसे मेढक का डिसेक्शन नहीं होता था। घर वाले चाहते थे कि डॉक्टर बनूं। पर, मैं दूसरों की दिक्कतों को दूर करवाने में सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहता था। कक्षा सातवीं में मैंने गांव के मजदूरों की मजदूरी बढ़वाने के लिये जुलूस भी निकाला था। इससे परिजन नाराज हुए, पर मेरा दिल इसी में रमता गया।
सीएम का जवाब- दूसरों की दिक्कत दूर करने में सहयोग करता था, इसी में रम गया
पापा नहीं हैं, भाई-बहनों की पढ़ाई में परेशानी... ये कहते रोने लगी छात्रा, सीएम ने मदद के लिए अफसरों को निर्देश दिए
कार्यक्रम में छात्रा अदिति ठाकुर सीएम से बोलते-बोलते भावुक हो गई। अदिति ने बताया कि उसके पापा नहीं रहे। वे चार भाई-बहन हैं। पैसे की वजह से उनका एडमिशन नहीं हो पा रहा। इस पर सीएम ने कहा कि वे उससे प्रिंसिपल के कक्ष में मिलेंगे। इसके बाद सीएम ने अदिति की मदद के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।
जेएनयू या डीयू में दाखिला होता है तो क्या फीस सरकार भरेगी? - रोहित श्रीवास्तव, भिंड
चौहान : ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये तक है। उनके बच्चों की फीस सरकार द्वारा भरवाई जाती है। उनका प्रवेश जेएनयू या डीयू कहींं भी हो।
घर से कॉलेज की दूरी बहुत है। क्या करें ? - ललित पटेल शेष | पेज 11 पर
चौहान - गांव से शहर पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों के लिये निश्चित सीमा तक परिवहन व्यय की व्यवस्था है। छात्रों को पढ़ने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
सवाल - राजनीति में कॅरियर बनाने के लिए क्या करना होगा? - गुंजन सिंह पटेल
चौहान - राजनीित में अच्छे लोगों को आना चाहिए। दो तरह के लोग राजनीित में आते हैं। एक वे होते हैं जो येन-केन-प्रकरेण कुछ भी हासिल करना चाहते हैं। लेकिन, सफल वे होते हैं जो दूसरों का दर्द समझते हैं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री बनूंगा। यह रास्ता बाहर से देखने में बहुत अच्छा है अंदर से बहुत आरोप प्रत्यारोप झेलना पड़ते हैं। बहुत कुछ सहना पड़ता है। उन्होंने कहा बेटी जब मैं सामान्य परिवार का व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता हूं तो तुम भी बन सकती हो। नरेंद्र मोदी भी साधारण परिवार से हैं और प्रधानमंत्री हैं।
---
सवाल - असफलता के डर से कैसे लड़ें। जब आपने पहली बार चुनाव लड़ा तो क्या आपके मन में भय था? फिर आपने कैसे खुद को मजबूत बनाया। - अंकित गुप्ता
जवाब - कभी परिणाम की चिंता न करें, केवल कर्म पर फोकस करें। मैं लड़ा तो जीतने के लिए लड़ा। मुझमें विश्वास था। खुद में विश्वास पैदा करो, खूब मेहनत करो।
----
सवाल - संस्थान और काेर्स में से किसे प्राथमिकता दें?- अंकिता यादव
चौहान - रुचि के मुताबिक काेर्स को प्राथमिकता दें। यह भी देखें कि संस्थान स्तरहीन न हो।
----
स्टूडेंट्स को फोन पर ही दिए फंडे
सीएम ने लाइव फोन इन कार्यक्रम में प्रदेश भर के छात्राें से भी चर्चा की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह, रोजगार बोर्ड के अध्यक्ष हेमंत देशमुख, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा बीआर नायडू और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल यहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
----
जिसमें रुचि उसमें बनाएं कॅरियर, माता-पिता भी बच्चों पर न डालें दबाव : सीएम
चौहान ने कहा कि अभिभावक बच्चों पर दबाव नहीं डालें। उनकी रुचि के मुताबिक कॅरियर को चुनने में उनकी मदद करें। अर्थहीन शिक्षा का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी लक्ष्य असभंव नहीं है। जैसा व्यक्ति सोचता है वैसा बनता है।इस मौके पर उन्होंने मायएमपी रोजगार पोर्टल भी शुरू किया।
----
हर जवाब के साथ आगे बढ़ने की राह दिखाई