एक मां से बच्चे को अलग करने के मामले में बाल कल्याण समिति ने दादा और नानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। समिति का कहना है कि जब तक बच्चे की जैविक मां जिंदा है, तब तक बच्चा उसके पास ही रहेगा। भले ही मां ने दूसरी शादी कर ली हो। समिति ने कहा चूंकि दादा और नानी भावनात्मक रूप से बच्चे से जुड़े हैं और बच्चा दादा के वंश को बढ़ाने वाला है इसलिए उसके बालिग होने तक वे समय समय पर बच्चे जाकर मिल सकते हैं।
चाइल्ड लाइन में एक महिला ने शिकायत की थी उसके बच्चे को उसकी नानी और ससुर जबरदस्ती ले गए हैं। जब वह बच्चा लेने गई तो उन्होंने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद महिला ने मामले में एसजेपीयू व बाल कल्याण समिति में शिकायत की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद समिति ने बच्चे की कस्टडी जैविक मां को दे दी। चार दिन बाद दादा और मौसी नानी मां बच्चे को अपने साथ फिर ले गई। इस समिति ने तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
3 लोगों ने किया था दावा
पांच साल के एक बच्चे पर तीन लोगों ने पालने का दावा पेश किया था। तर्क था कि पति की आत्महत्या के बाद मां ने दूसरी शादी कर ली है, इसलिए बच्चे को पालने का हक उनको मिलना चाहिए। हक जताने वालों में बच्चे का दादा हरदास विश्वकर्मा, नानी की दो बहनें अनीता व सुनीता विश्वकर्मा हैं। अनीता सुनीता का कहना है कि जब बच्चे की पिता की मौत हुई थी तब बच्चे की मां सदमे में आ गई थी। उन्होंने ही बच्चे को पाल पोसकर बड़ा किया,तो बच्चे पर उनका ही हक है।
वहीं दादा का कहना है कि जब तक बच्चा नानी मौसियों के पास था उन्हें चिंता नहीं थी अब मां ने शादी कर ली है, इसलिए बच्चा उन्हें मिलना चाहिए।
बच्चे को लेकर तीन लोग अपना दावा पेश कर रहे हैं। जेजे एक्ट के अनुसार जब तक बच्चे के जैविक माता-पिता जिंदा है उस पर पहला हक उनका ही होगा। माता-पिता की मौत होने की बाद बच्चे पर दादा का हक बनता है।
रेखा श्रीधर, बाल कल्याण समिति