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खुद मूल्यांकनकर्ताओं ने ही उठाए बीयू की व्यवस्था पर सवाल कहा- अपात्र चैक कर रहे कॉपियां, राजभवन ने मांगा जवाब

3 वर्ष पहले
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रक्रिया पर अभी तक छात्र निशाना साधते रहे हैं। इस बार मूल्यांकनकर्ताओं ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद राजभवन ने विवि प्रशासन से जवाब मांगा है। डॉ. आजाद अहमद मंसूरी, डॉ. राजेश कचौली व डॉ. अखिल रैकवार सहित अन्य ने राज्यपाल को शिकायत कर कहा है कि बीयू अपात्रों से मूल्यांकन करा रहा है। जबकि पात्र मूल्यांकनकर्ताओं को जांच करने की कार्रवाई में फाइलों में अटकाकर रखा जाता है। मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए विश्वविद्यालय के पास कोई तय गाइडलाइन नहीं है। बीयू ने 30 जून तक सेमेस्टर परीक्षा के रिजल्ट घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस जल्दबाजी में नियमों को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। अधिकारी भी सहूलियत देख रहे हैं। इन्होंने सवाल इसलिए भी खड़े किए क्योंकि मूल्यांकन कराने की प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञों को स्थान नहीं दिया गया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार को भी शिकायत की गई थी। लेकिन, उनके द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो यह मसला राजभवन तक पहुंच गया है। जिसमें सेंट्रल वेल्युएशन की व्यवस्था को बंद करने का कारण भी पूछा गया है।

आरोप यह भी- मूल्यांकन प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञों को स्थान नहीं, 30 जून तक रिजल्ट घोषित करने की जल्दी में नियम तोड़ रहा बीयू

प्राइवेट कॉलेज के अपात्र शिक्षकों को दी जा रही उत्तरपुस्तिका

न्यूनतम समय निर्धारित ही नहीं

एक उत्तरपुस्तिका को जांचने के लिए न्यूनतम समय कितना होना चाहिए, एक रेगुलर शिक्षक एक दिन में कितनी उत्तरपुस्तिका जांच सकता है, यह स्पष्ट नहीं है। इसलिए शिक्षकों को उत्तरपुस्तिकाएं देने भी भेदभाव किया जा रहा है। किसी को एक हजार से अधिक तक उत्तरपुस्तिकाएं दी जा रहीं है तो किसी को 300-400 उत्तरपुस्तिकाएं देकर मूल्यांकन कराया जा रहा है।

प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षकों से मूल्यांकन कराने की व्यवस्था पर निशाना साधा गया है। क्योंकि इन कॉलेजों में कोड-28 के में कार्यरत कई शिक्षक यूजीसी द्वारा निर्धारित योग्यताएं पूरी नहीं करते हैं। इसके अलावा सरकारी कॉलेजों में कार्यरत कई अतिथि विद्वान भी तय मापदंड पर खरे नहीं उतरते। ऐसे अपात्र लोगों से भी विश्वविद्यालय शिक्षण कार्य तो ले ही रहा है, साथ ही साथ मूल्यांकन भी इनसे करा रहा है।

मानदेय के हिसाब से देते हैं उत्तरपुस्तिकाएं : रजिस्ट्रार

बीयू के रजिस्ट्रार डॉ. यूएन शुक्ल का कहना है कि राजभवन को पूरी जांच करके जवाब पहुंचाया जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार किसी भी शिक्षक को एक सत्र में 60 हजार रुपए से अधिक मानदेय की उत्तरपुस्तिका नहीं दी जाती। यूजी में एक उत्तरपुस्तिका को जांचने के लिए 20 रुपए और पीजी में 25 रुपए दिए जाते हैं। डॉ. शुक्ल का कहना है कि सेंट्रल वेल्युएशन कराया तो लोगों ने उसमें भी खामियां निकाली। अब शिक्षकों को घर पर मूल्यांकन करने छूट दी तो यह व्यवस्था भी लोगों को पसंद नहीं आ रही है।

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