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शेयरों की कागजी बिक्री से जुटाए 700 करोड़, फिर बांट दिया लोन

3 वर्ष पहले
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हवाला रैकेटियर शरद दरक ने नोटबंदी के दौरान इंदौर और भोपाल समेत पड़ोसी राज्यों के करीब 400 लोगों से कैश लेकर उन्हें चेक जारी किए। इन लोगों में कई नामचीन व्यापारी, सीए और कुछ प्रभावशाली सरकारी अधिकारी भी शामिल हंै। यह जानकारी दरक के यहां पड़े छापे में मिले दस्तावेजों की पड़ताल के बाद सामने आई। इसी के चलते दरक के यहां पड़ा छापा पिछले चार दिन से इंदौर-भोपाल में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। व्यापारी और सीए आपस में बातचीत करके यह कायास लगाते रहे कि इन दस्तावेजों में किस-किस के नाम सामने आ सकते हैं? इन सारे चेक का मूल्यांकन 700 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इनमें से ज्यादातर लेन-देन नोटबंदी यानी 8 नवंबर 2016 के बाद हुए। जब ज्वैलरी और उपभोक्ता सामानोें में नकद खरीदारी करने वालों की धरपकड़ शुरू होने के बाद लोग अपने नोट नहीं खपा पा रहे थे। ऐसे में इन लोगों ने दरक को नकद पैसा देकर चेक लिए। इतने बड़े पैमाने पर हुए लेन-देन पर आयकर विभाग का जांच दल खुद हैरान रह गया। इन्हीं चेक के जरिए भोपाल की श्री गोविंद रियलिटी फर्म को 20 करोड़ से ज्यादा मिले। श्री गोविंद रियलिटी फर्म में असनानी और कृपलानी पार्टनर हैं। इस तरह की ढेरों कंपनियों में कृपलानी, असनानी और बिंद्रा पार्टनर बताए जा रहे हैं। कृपलानी के पास शहर के प्रमुख इलाकों में बड़ा लैंड बैंक है। इनमें वह दर्जनों पार्टनर के जरिए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। ऐसे ही एक फर्म में अंचलम इन्फ्रा के सौरभ यादव भी पार्टनर हैं। उनकी भी फर्म छापे की जद में आई थी। विभाग ने आशंका जताई है कि दरक ने जो आशिमा माल में पैसा लगाया है, वह पैसा प्रॉपर्टी की नगद बिक्री से मिला था। दरक के दस्तावेजों में असनानी, कृपलानी और बिंद्रा के साथ दूसरे लोगों के भी नाम सामने आ चुके हैं।

छत पर पानी की टंकी के पास दुबका था दरक

चालबाजी जिस शेयर का मूल्य 10 रुपए था, उसे 250 में बेचना बताया

दरक ने जो पैसा दिया, उसे उसने लोन पर देना बताया। उसने बताया कि लोन देने के लिए पैसा उसे अपनी कंपनियों के शेयरों की बिक्री से मिले। उसके इस दावे की पड़ताल की गई तो सामने आया कि दरक के पास कोलकाता स्थित 12 कंपनियां थी। यह सारी कंपनियां शेल थीं। इसके साथ ही उसने करीब 50 कंपनियों के शेयरों की बिक्री से भी धन मिलना बताया। दरक ने इन सभी में अपनी उच्च हिस्सेदारी होने का दावा किया था। जांच में यह सारी कंपनियां भी फर्जी पाई गई। इनके जिस शेयर का मूल्य केवल 10 रुपए था। वह 250 रुपए तक में बेचना बताया गया। यह शेयरों की सारी खरीद फरोख्त केवल नकद में मिले पैसे को वैध करार देने के लिए की गई। इस तरह के लाखों शेयरों की कागजी बिक्री की गई।

भोपाल के बड़े नाम

हुंडियों में बड़े व्यापारियों के नाम- शरद के पास से जो हुंडियां मिली हैं उनमें करोड़ों रुपए के लेन देन के प्रमाण मिले हैं। ज्यादातर हुंडियां इंदौर और कुछ भोपाल के व्यापारियों के नाम मिले हैं। विभाग पड़ताल करने के बाद सोमवार से कई व्यापारियों को पूछताछ कि लिए बुला सकता है।

खुलासा... नकद में पैसा लेकर जारी किए चेक, पूछताछ में बताया लोन पर दिए थे पैसे

शरद दरक के घर जब आयकर विभाग ने दबिश दी तब वह घर की छत पर बनी पानी की टंकी के पास जाकर दुबक गया। प|ी ने आयकर विभाग की टीम से कहा कि शरद कारोबार के सिलसिले में बाहर गए हैं। विभाग को प|ी की बात पर यकीन नहीं था। क्योंकि उसके पास पुख्ता सूचना थी कि शरद घर पर ही है। इसके बाद पूरे घर में उसे ढूंढने का काम शुरू हुआ। तकरीबन एक घंटे बाद शरद पानी की टंकी के पास से तालाशा जा सका।

नोटबंदी के बाद

400 लोगों को चेक के जरिए मिला दरक से लोन

खुलासा 90 फीसदी प्लाट और फ्लैट नकदी में बेचे

श्री गोविंद रियलिटी फर्म में असनानी, कृपलानी और प्रीतपाल सिंह बिंद्रा पार्टनर हैं। नोटबंदी के दौरान इनकी पार्टनरशिप फर्मों ने करीब 90 फीसदी प्लाट और फ्लैट नकदी में बेचे। हालांकि यह फर्म बिंद्रा और असनानी का संयुक्त उपक्रम थी। यह खरीदारी करने वालों में उच्च दर्जे से लेकर मझौले दर्जे तक के सरकारी अधिकारी शामिल थे। कई अधिकारियों ने अपने बच्चों और प|ी के नाम पर यह प्रापर्टी खरीदी। इसका सारा भुगतान ऑन मनी हुआ। आयकर विभाग डेवलपर्स से जानकारी एकत्र करके ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार कर रहा है। जानकारी के अनुसार यह सारी खरीद नोटबंदी के दौरान ही हुई। संभव है इस तरह से मिली नकदी को बाद में दरक तक पहुंचाया गया।

20 करोड़ रु. का लोन मिला श्री गोविंद रियलिटी को

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