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नमाज पढ़ने भूटान से 6 घंटे का सफर कर इंडिया बॉर्डर में आते

3 वर्ष पहले
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अलीम बजमी

सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर इकबाल सिद्दीकी ने सेना में रहते हुए कई दायित्वों का निर्वाह किया। कई देश घूमे तो कई विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भी रहे हैं। वे इन दिनों बड़वई रोड स्थित संजीव नगर में परिवार के साथ रहते हैं।

74 वर्षीय सिद्दीकी का बचपन रेतघाट स्थित ननिहाल में गुजरा। उनके वालिद अनवार अहमद सिद्दीकी सीपी बरार स्टेट के जमाने में होशंगाबाद, नागपुर और अकोला में तहसीलदार फिर एडीएम भी रहे। भोपाल में उनकी इंटरमीडिएट तक शिक्षा होने के बाद जबलपुर और फिर हॉलैंड में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। रमजान से जुड़ी उनकी कई यादें हैं। वे बताते हैं कि 1964 में आर्मी ज्वॉइन की। लेकिन कभी उनके रोजे मिस नहीं हुए। न कभी सेहरी और इफ्तार को लेकर कोई दिक्कत हुई। आर्मी में इन बातों का खास ख्याल रखा जाता है। वे बताते हैं कि वर्ष 1993 में उनकी पोस्टिंग भूटान में होने के बाद उन्हें ईदुल फितर हो ईदुल अजहा, दोनों की नमाज पढ़ने 6 घंटे का सफर करके इंडिया बॉर्डर पर स्थित जयगांव आना पड़ता था। इसकी बाकायदा इजाजत मिलती थी। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में वे करीब साढ़े तीन साल रहे। तब उनके सीईओ कर्नल कोचर रमजान में उनका खास ख्याल रखते। इससे जुड़ा एक वाकया उन्होंने बताया कि ईदुल फितर आने के दौरान कर्नल कोचर ने उन्हें बुलाकर पूछा कि आप नमाज कहां पढ़ेंगे। वे सोचने लगे। तभी कर्नल ने बताया कि सभी मुस्लिम ऑफिसर व जवान को उन्होंने ईद की सुबह कैंप में तलब किया है, वे उन्हें लीड करते हुए नमाज पढ़ने जाएंगे। सिद्दीकी के मुताबिक वे जब हॉलैंड में तालीम हासिल कर रहे थे तब वहां पूरे रोजे रखे थे। लेकिन वहां पाकिस्तानी स्टूडेंट रोजे को लेकर बहुत अधिक गंभीर नहीं रहते थे। वे बताते हैं कि बचपन में उन्होंने पहला रोजा रखा तो बड़ा जलसा हुआ था। घर का माहौल दीनी होने से उनके अंदर ललक रहती जल्दी मस्जिद में पहुंचकर अजान देने की। उनका ये शौक देख खुद मोहल्ले के बुजुर्ग अजान देने को कहते थे। रेतघाट में बड़े तालाब किनारे उनके नाना मंसूर अहमद एसडीओ पीडब्ल्यूडी का मकान था। फुर्सत में वे किनारे पर बैठ जाते। रोजे का वक्त लहरों को देखते हुए जल्द गुजर जाता।

इकबाल सिद्दीकी

रमजान-उल-मुबारक की हिदायतों में अनुशासन है। इसमें संदेश आत्मीय व्यवहार की शिक्षा का है। ये नजरिया सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर इकबाल सिद्दीकी का है।

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