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सरकारी दफ्तरों में बैठे रहे अफसर, लेकिन आगे नहीं बढ़ सकीं फाइलें

3 वर्ष पहले
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कलेक्टोरेट, तहसील व एसडीएम दफ्तरों में शुक्रवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। अफसर तो कैबिन में बैठे थे, लेकिन कर्मचारी नदारद थे। कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से किसानों का काम नहीं हो सका। सरकारी काम-काज भी प्रभावित हुआ, फाइलें भी आगे नहीं बढ़ सकीं। किसी के नक्शे नहीं बन सके तो कोई नामांतरण नहीं करा पाया। गुरुवार से कर्मचारी वेतन, भत्तों समेत विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। शुक्रवार को हड़ताल का आखिरी दिन था। लघु वेतन, तृतीय वर्ग, मंत्रालयीन, लिपिक वर्ग समेत छह संगठनों के बैनर तले कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश ले लिया था। शुक्रवार को कलेक्टोरेट के अलावा मंत्रालय में ही हड़ताल का असर दिखाई दिया। इनके अलावा लोक शिक्षण संचालनालय, अमरकंटक भवन, निर्माण भवन में भी अधिकारी मौजूद थे। यहां भी कर्मचारी नजर नहीं आए। मंत्रालय के बाहर हड़ताली संगठनों के कर्मचारी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। बाहर सभा हुई, जिसे उमाशंकर तिवारी, एलएन शर्मा, विजय रघुवंशी, सुधीर नायक, मनोज वाजपेयी समेत कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया। आरटीओ में भी किसी तरह का काम नहीं हुआ।

लोगों को सिर्फ एक दिन की हड़ताल का था पता
दोपहर 12 बजे कलेक्टोरेट पहुंचे निपानिया जाट के गजराज सिंह जाट ने बताया कि वे नक्शा बनवाने आए थे। सिर्फ गुरुवार को ही हड़ताल के बारे में मालूम था। यहां पहुंचे तो पता चला कि कर्मचारी दूसरे दिन भी हड़ताल पर हैं। अब सोमवार को आना पड़ेगा।

परवलिया सड़क के किसान कोमल पाटीदार ने बताया कि वे नामांतरण संबंधी काम के लिए तहसील आॅफिस आए थे। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण काम नहीं हो सका। कुराना के मनोहर सिंह मंडलोई ने बताया कि उनका भी नामांतरण नहीं हाे सका।

कलेक्टोरेट, तहसील व एसडीएम कार्यालयों में सन्नाटा, न नक्शे बने, न नामांतरण हुआ

विंध्याचल, सतपुड़ा में नहीं हुआ असर
विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में हड़ताल का ज्यादा असर नहीं रहा। यहां ज्यादातर दफ्तरों में सामान्य दिनों की तरह काम- काज होता रहा। राजधानी के अन्य दफ्तरों में भी काम- काज पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

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