कलेक्टर गाइडलाइन के लिए नए नियम जारी
नई कलेक्टर गाइडलाइन के सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं। नए नियमों के अनुसार अब एक साल में हुई रजिस्ट्री के औसत मूल्य के आधार पर गाइडलाइन बनेगी। नियमों में जरूरी किया गया है कि उपमूल्यांकन समिति एक साल के भीतर हुई रजिस्ट्री के दस्तावेजों की जांच करेगी। अगर इस अवधि में कोई रजिस्ट्री नहीं हुई होगी तो बाजार मूल्य के आधार पर गाइडलाइन तय की जाएगी। इसके लिए पटवारी, तहसीलदार के माध्यम से बाजार मूल्य की जानकारी दी जाएगी। नई गाइडलाइन बनाने के लिए भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 (1899 का 2 ) की धारा-2 (16) ग धारा-75 के तहत बनाई जाएगी। दरअसल, 23 अक्टूबर 2017 को पंजीयन विभाग ने भारतीय स्टाम्प (मप्र संशोधन) अधिनियम 2016 में संशोधन कर स्टाम्प अधिनियम की धारा 47 (क) को विलोपित कर दिया था। इसके बाद से नई गाइडलाइन बनाने के नियम भी खत्म हो गए थे।