बाब साहेब ने संविधान के माध्यम से सामाजिक न्याय को जमीन पर उतारा
पॉलिटिकल रिपोर्टर. भोपाल | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बाबा साहब अंबेडकर ऐसे महामानव थे जिनका दिल हर शोषित और पीड़ित के लिए धड़कता था। उन्होंने संविधान के माध्यम से सामाजिक न्याय को जमीन पर उतारने का काम किया। वे हमारे संविधान निर्माता होने के साथ-साथ महान समाजसुधारक, अर्थशास्त्री और उच्च कोटि के विद्वान भी थे। मुख्यमंत्री शुक्रवार को ‘दिल से’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सीएम ने कहा कि अंबेडकर ने उद्योगों में महिला और पुरुषों के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए प्रसूति लाभ का प्रावधान करवाया था। कारखानों में काम के घंटे बारह से घटाकर से आठ करवाया था। उन्होंने महिलाओं की गरिमा लौटाने और तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार, विवाह में समान अधिकार दिलाने के लिए भी संघर्ष किया। महिलाओं को समान मतदान का अधिकार दिलाने में भी उनकी मह्त्वपूर्ण भूमिका थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना के पीछे उन्हीं का विचार था। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा था कि अंबेडकर अर्थशास्त्र में मेरे पिता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर दीनदयाल उपाध्याय, महात्मा गांधी, राममनोहर लोहिया सबकी सोच एक ही थी कि गरीब और सबसे पिछड़ों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। संविधान में इनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश में सामाजिक समरसता के साथ इन वर्गों को आगे बढ़ाया जाना है। इसके चलते शिक्षा के क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए आश्रम छात्रावास और ज्ञानोदय विद्यालय खोले जा रहे हैं। महिला श्रमिक के खाते में 12 हजार रुपए जमा कराए जाएंगे।
ये की घोषणाएं
प्रदेश के पांच अनुसूचित बाहुल्य जिलों दतिया, छतरपुर, विदिशा, सतना और शाजापुर में 480 सीट क्षमता के पांच नए कन्या ज्ञानोदय विद्यालय खोले जाएंगे। पोस्टमैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में शासकीय संस्थाओं के विद्यार्थियों के वार्षिक आय सीमा का बंधन समाप्त किया जाएगा। पहले यह आय सीमा तीन लाख रुपए थी वार्षिक थी, जिसे बढ़ाकर 6 लाख रुपए किया जाएगा।